No- 395. कमबख़्त दिल, भरोसे की आदत लयबद्ध भाव-कविता | तालियों और तबले की संगत
🎵 मुखड़ा
बार-बार विश्वास है टूटा,
फिर भी दिल ये मानता नहीं,
दुनिया ने तो लाख सिखाया,
दिल को मगर समझ आता नहीं।
कमबख़्त मेरा दिल है ऐसा,
भरोसा करना छोड़ता नहीं!
लाख दफ़ा ये टूट चुका है,
फिर भी किसी से रूठता नहीं!
१. बचपन का भरोसा
बचपन में जिनको अपना माना,
उनसे ही धोखा खाया था,
भोले मन को राह दिखाएँगे,
सोच के हाथ बढ़ाया था।
जिन हाथों को थाम के चलना,
उनसे ही ठोकर खाई थी,
जिस उम्र में सपने थे सजते,
उस उम्र में चोट पराई थी।
बार-बार विश्वास है टूटा,
फिर भी दिल ये मानता नहीं,
कमबख़्त मेरा दिल है ऐसा,
भरोसा करना छोड़ता नहीं!
२. दोस्ती के दिन
उम्र बढ़ी तो दोस्त मिले कुछ,
कुछ अपने कहलाने आए,
दिल की बातें दिल से बाँटीं,
सपने नए सजाने आए।
जिनको अपना राज़ बताया,
कुछ ने वही उछाला था,
जिन पर सबसे ज़्यादा यक़ीं था,
उनसे ही दिल हारा था।
फिर भी दिल ने आस लगाई,
सबका मन तो काला नहीं,
एक ने धोखा दिया अगर तो,
हर इंसान निराला नहीं!
बार-बार विश्वास है टूटा,
फिर भी दिल ये मानता नहीं,
कमबख़्त मेरा दिल है ऐसा,
भरोसा करना छोड़ता नहीं!
३. मोहब्बत का फ़साना
चार लफ़्ज़ मोहब्बत के सुनकर,
दिल ने ख़्वाब सजाए थे,
सच्चे मन से रिश्ता जोड़ा,
अपने अरमान बताए थे।
मैंने चाहा साथ निभाना,
उसने रिश्ता तोड़ दिया,
जिसको अपनी दुनिया माना,
उसने मुझको छोड़ दिया।
दिल ने फिर भी यही कहा,
प्यार से मुँह मोड़ूँ क्यों?
एक कहानी झूठी निकली,
हर कहानी छोड़ूँ क्यों?
बार-बार विश्वास है टूटा,
फिर भी दिल ये मानता नहीं,
कमबख़्त मेरा दिल है ऐसा,
भरोसा करना छोड़ता नहीं!
४. पत्नी का साथ
फिर जीवन में शाम हुई तो,
एक नया उजियारा आया,
पत्नी बनकर जीवन में,
सच्चे साथ का रंग छाया।
जब-जब मुश्किल सामने आई,
उसने हाथ बढ़ाया था,
जब मैं ख़ुद से हार रहा था,
उसने मुझे उठाया था।
दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे,
जो हर दर्द मिटाते हैं,
टूटे दिल को प्यार से जोड़ें,
जीने की आस जगाते हैं।
साथ मिला तो जाना मैंने,
हर रिश्ता बेगाना नहीं,
कुछ रिश्ते भगवान-से होते,
जिनका कोई मोल नहीं!
५. ख़ून के रिश्ते
जिनसे सबसे आस लगाई,
जिनको अपना मान लिया,
कुछ अपनों ने वक़्त पड़ने पर,
दिल को मेरे दर्द दिया।
ग़ैरों की चोट सहन करूँ मैं,
अपनों से क्या बोलूँगा?
जिनके संग सपने देखे थे,
उनसे दूरी क्यों झेलूँगा?
रिश्ते केवल ख़ून से नहीं,
विश्वासों से पलते हैं,
जहाँ भरोसे टूटें बार-बार,
वहाँ अपने भी बदलते हैं।
दिल ने फिर भी आस न छोड़ी,
नफ़रत करना आता नहीं,
कमबख़्त मेरा दिल है ऐसा,
भरोसा करना छोड़ता नहीं!
६. दुनिया का दस्तूर
आज ज़माने को देखा है,
चेहरों को पहचाना है,
किसके मन में प्यार बसा है,
किसने स्वार्थ छिपाना है।
मतलब तक कुछ लोग हैं अपने,
मतलब तक व्यवहार है,
काम निकलते ही पहचानें,
बदल गया संसार है।
अब आँखें मूँद भरोसा करना,
मैंने थोड़ा छोड़ दिया,
दिल के हर दरवाज़े पर अब,
समझदारी का पहरा दिया।
लेकिन दिल की एक अदा है,
जो बदलती ही नहीं,
चोट मिले सौ बार भले ही,
उम्मीद मरती ही नहीं!
७. दिल की फ़ितरत
लोग कहें अब सुधर भी जाओ,
दुनिया से कुछ सीखो तुम,
हर किसी को अपना मानकर,
क्यों ख़ुद को तकलीफ़ दो तुम?
मैंने कहा, हाँ, सीख रहा हूँ,
अब पहले-सा भोला नहीं,
लेकिन दिल में प्यार बचा है,
नफ़रत का मैं शोला नहीं।
हर इंसान बुरा नहीं होता,
हर चेहरा ग़द्दार नहीं,
भरोसा करना ग़लत नहीं है,
बस हर कोई हक़दार नहीं!
दिल को थोड़ा समझाऊँगा,
हर किसी पर ऐतबार नहीं,
लेकिन दिल को मार के जीना,
मुझको ये स्वीकार नहीं!
८. अंतिम अंतरा — भावनात्मक उत्कर्ष
कितनी बार भरोसा टूटा,
कितनी बार बिखर गया,
फिर भी दिल उम्मीद लिए,
हर मुश्किल से गुज़र गया।
दुनिया ने पत्थर बनाना चाहा,
मैं इंसान बना रह गया,
लोगों ने विश्वास तोड़ा,
दिल विश्वास की राह पर रह गया।
तालियाँ बजें, तबला गूँजे,
दिल की बात सुनाता हूँ,
टूट गया हूँ बार-बार मैं,
फिर भी भरोसा निभाता हूँ!
🎵 समापन — मुखड़ा (दो बार, दूसरी बार धीमी ताल में)
बार-बार विश्वास है टूटा,
फिर भी दिल ये मानता नहीं,
दुनिया ने तो लाख सिखाया,
दिल को मगर समझ आता नहीं।
कमबख़्त मेरा दिल है ऐसा,
भरोसा करना छोड़ता नहीं!
लाख दफ़ा ये टूट चुका है,
फिर भी भरोसा टूटता नहीं!
कमबख़्त मेरा दिल ही ऐसा है...
भरोसा करने की आदत आज तक छूटी नहीं! 💔🎶
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