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No- 380. राकेश मिश्रा — 100 शायरियाँ

जिंदगी, रिश्ते, संघर्ष, प्रेम, स्वाभिमान और इंसानियत के रंग 1. सफर चल पड़ा हूँ तो रास्ते खुद बनेंगे, आज काँटे हैं तो कल फूल भी खिलेंगे। मंज़िल की चिंता नहीं, कदमों पर भरोसा है, जो मेरे साथ चले, वही मेरा कारवाँ है। 2. संघर्ष धूप ने पूछा—कितना और जलोगे? मैंने हँसकर कहा—जब तक निखर न जाऊँ। मुश्किलों ने पूछा—कब तक लड़ोगे? मैंने कहा—जब तक खुद से न जीत जाऊँ। 3. वक्त वक्त ने बड़ी खामोशी से सबक सिखाया, जिसे अपना समझा, उसका असली चेहरा दिखाया। कुछ रिश्ते टूटे तो कुछ मजबूत हुए, हम भी कल से थोड़ा ज्यादा समझदार हुए। 4. ठोकर ठोकर लगी तो रास्ता बदलने की सोची, फिर देखा—मंज़िल तो सामने ही खड़ी थी। बस नजर में थोड़ा धैर्य कम था, और कदमों में थोड़ा भरोसा कम था। 5. हौसला आंधियाँ आईं तो दीये को हाथों में ले लिया, रात लंबी थी तो खुद को संभाल लिया। किसी से रोशनी माँगने की आदत नहीं थी, सो अपने भीतर ही एक सूरज पाल लिया। 6. स्वाभिमान झुकना सीखा है मैंने रिश्तों के सम्मान में, मगर बिकना नहीं सीखा किसी के अभिमान में। जो देना हो इज्जत से दो, स्वीकार कर लूँगा, पर अपनी आत्मा का सौदा कभी ...

No- 379. राकेश मिश्रा के 200 शेर और शायरियाँ

दिल भी रहे, तेवर भी रहे और बात दिल तक भी पहुँचे खंड 1 — जिंदगी और संघर्ष 1. हालातों ने सिखाया है हालातों से लड़ना, गिरना कोई हार नहीं, फिर उठकर आगे बढ़ना। 2. ठोकरों ने मेरे कदमों को कमजोर नहीं किया, हर गिरावट ने मुझे पहले से बेहतर किया। 3. रास्ते मुश्किल थे तो हौसला बढ़ता गया, मैं चलता रहा और रास्ता बनता गया। 4. किस्मत के भरोसे बैठना मुझे आया नहीं, जो चाहिए था, उसे मेहनत से पाया सही। 5. वक्त ने कई बार मेरी परीक्षा ली, हर बार मैंने जिंदगी की नई किताब पढ़ी। 6. जो दर्द मिला उसे मुस्कान में ढाल दिया, जिंदगी ने जो दिया, उसे कमाल में ढाल दिया। 7. मैं थका जरूर हूँ, मगर रुका नहीं हूँ, अभी सफर बाकी है, मैं झुका नहीं हूँ। 8. कुछ सपने टूटे, कुछ नए बन गए, हम जिंदगी के साथ-साथ खुद भी बदल गए। 9. मुश्किलें आईं तो डरने की बजाय सोचने लगा, रास्ता बंद मिला तो रास्ता खोजने लगा। 10. मेरी कहानी आसान नहीं, मगर मेरी है, हर दर्द के पीछे कोई सीख खड़ी है। 11. मैंने अंधेरों से दोस्ती कर ली एक दिन, तभी तो उजाले की कीमत समझ आई। 12. जिंदगी ने पूछा—कितना चल सकते हो? मैंने कहा—जब...

No-378. Master Your Salary with the 50/30/20 Rule

वेतन आपका मालिक नहीं, आपकी आर्थिक स्वतंत्रता का साधन है हर महीने वेतन आता है। कुछ दिनों के लिए लगता है कि अब आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। फिर घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, किराना, बिजली, मोबाइल, यात्रा, EMI, सामाजिक जिम्मेदारियाँ और अचानक आने वाले खर्च—धीरे-धीरे पूरा वेतन समाप्त कर देते हैं। महीने के अंत में व्यक्ति फिर वही प्रश्न पूछता है— “पैसा गया कहाँ?” समस्या हमेशा कम वेतन की नहीं होती। कई बार समस्या यह होती है कि वेतन का कोई स्पष्ट काम तय नहीं होता। यही वह जगह है जहाँ 50/30/20 Rule एक सरल लेकिन शक्तिशाली वित्तीय अनुशासन बन सकता है। इसका मूल विचार है— 50% — Needs यानी आवश्यकताएँ 30% — Wants यानी इच्छाएँ और जीवनशैली 20% — Savings & Future यानी बचत, निवेश और भविष्य लेकिन इसे केवल तीन प्रतिशत में बाँटना पर्याप्त नहीं है। असल सवाल यह है— कब खर्च करना है? किस पर खर्च करना है? किस खर्च को आवश्यकता मानना है? किसे इच्छा समझना है? बचत किसके लिए करनी है? निवेश कहाँ करना है? और सबसे महत्वपूर्ण—इस व्यवस्था को जीवन के अलग-अलग चरणों में कैसे बदला जाए? इसीलिए 50/30/20 Rule को केवल Budgeting...

No- 376. Gen Z का भविष्य: Skill, Ability और Value की त्रिवेणी

एक ऐसी युवा पीढ़ी की खोज, जो केवल रोजगार पाने वाली नहीं, बल्कि भविष्य बनाने वाली हो हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब दुनिया का परिवर्तन केवल तेज नहीं हुआ है, बल्कि उसकी गति लगातार बढ़ रही है। जिस तकनीक को कल भविष्य कहा जाता था, वह आज सामान्य हो चुकी है। Artificial Intelligence, Automation, Robotics, Digital Platforms, Biotechnology, Space Technology, Green Energy और नए-नए Digital Ecosystems ने काम, शिक्षा, व्यापार और सामाजिक जीवन की पारंपरिक परिभाषाओं को बदलना शुरू कर दिया है। इस परिवर्तन के केंद्र में आज की युवा पीढ़ी है— Gen Z । यह वह पीढ़ी है जिसने इंटरनेट को किसी नई चीज के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन के स्वाभाविक हिस्से के रूप में देखा है। इस पीढ़ी ने स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, YouTube, Short Video, E-commerce और अब Artificial Intelligence को बहुत तेजी से अपने जीवन में अपनाया है। लेकिन इसी के साथ एक बड़ा प्रश्न भी खड़ा होता है— क्या Technology का इस्तेमाल कर लेना ही भविष्य के लिए पर्याप्त होगा? क्या किसी युवा के पास केवल Degree होना पर्याप्त है? क्...

No- 375. इंसान की परिभाषा

१ इंसान वही, जो धर्म की राह— संकट में भी थामे रहता, राम-सी मर्यादा लेकर सत्य-अग्नि में झुलसे रहता। २ इंसान वही, जो न्याय हेतु— कृष्ण-शौर्य बन बनकर आए, धर्म-युद्ध में अडिग खड़ा हो अन्यायों से तनिक न घबराए। ३ इंसान वही, जो शक्ति पाकर— दंभ न लाए, नेत्र न फेरें, दुर्बल के आँसू पहचानें और सहारा देकर उन्हें घेरे। ४ इंसान वही, जो कर्म-पथों— पर गीता का स्वर सुन पाए, कर्तव्य को ईश्वर माने और हर क्षण उसको निभाए। ५ इंसान वही, जो जाति-धर्म— की दीवारों में मन न बाँधे, प्रेम, दया, सत्कर्म के सेतु हर उर में प्रतिदिन वह गाँथे। ६ इंसान वही, जो भारत-माँ— को जीवित मंदिर मान सके, मिट्टी, गंगा, वेद-धरा को अपने जीवन से जान सके। ७ इंसान वही, जो सत्य-ध्वजा— को आँधियों में भी थामे, राम-कृष्ण के पावन गुण हृदय-दीप में जाग्रत थामे। ⭐ पूर्ण सार राम सा वचन, कृष्ण का धर्म— यही मनुष्य का सच्चा मर्म। सत्य, पराक्रम, प्रेम का मान— यही भारत का सच्चा इंसान।