390- “हनुमान चालीसा आत्मचिंतन एवं Inner Development Journey”
हनुमान चालीसा : 100 आत्मचिंतन प्रश्न खंड 1 — मन का दर्पण मैं रोज हनुमान चालीसा पढ़ता हूँ—लेकिन क्या मैं अपने मन को भी पढ़ता हूँ? “निज मनु मुकुरु सुधारि” —मेरे मन का दर्पण आज कितना साफ है? मेरे भीतर की सबसे बड़ी कुमति क्या है? क्या मैं अपनी गलतियों को स्वीकार करता हूँ या उनके लिए दूसरों को दोष देता हूँ? मैं सुमति माँगता हूँ—लेकिन क्या सही बात समझ आने पर उसे स्वीकार भी करता हूँ? मेरी बुद्धि सत्य की खोज करती है या मेरे अहंकार को सही साबित करती है? मेरे भीतर कौन-सा विचार है जिसे मैं जानता हूँ कि गलत है, फिर भी छोड़ नहीं पा रहा? क्या मैं दूसरों के दोष जल्दी देखता हूँ और अपने दोष देर से? अगर मेरा मन एक दर्पण है, तो उसमें आज मुझे अपना कौन-सा चेहरा दिखाई देगा? क्या मेरी पूजा मेरे व्यवहार में दिखाई देती है? खंड 2 — गुरु, ज्ञान और विनम्रता “श्रीगुरु चरन सरोज रज” —क्या मैं वास्तव में किसी से सीखने के लिए तैयार हूँ? क्या ज्ञान बढ़ने के साथ मेरा अहंकार भी बढ़ रहा है? क्या मैं सलाह सुनता हूँ या केवल अपनी बात मनवाना चाहता हूँ? क्या मैं अपने से छोटे व्यक्ति से भी सीख सकता हूँ? मे...