No- 359. बदलते संयुक्त परिवार, टूटते संवाद और बिखरता अपनापनआधुनिक भारतीय समाज की सबसे बड़ी पारिवारिक चुनौती
भारत को सदियों से परिवारों का देश कहा जाता रहा है। यहां परिवार केवल खून का रिश्ता नहीं था, बल्कि संस्कार, सुरक्षा, त्याग, सहनशीलता, सहयोग और सामूहिक जीवन की जीवित परंपरा था। भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी पारिवारिक व्यवस्था मानी जाती थी। यही कारण था कि जब दुनिया का बड़ा हिस्सा व्यक्तिवाद की ओर बढ़ रहा था, तब भारत अपने संयुक्त परिवारों के कारण सामाजिक स्थिरता बनाए हुए था। एक समय था जब एक ही आंगन में दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई, भाई-बहन, भतीजे-भतीजियां, सभी साथ रहते थे। घर में मतभेद भी होते थे, बहस भी होती थी, आर्थिक कठिनाइयां भी होती थीं, लेकिन परिवार का ताना-बाना टूटता नहीं था। परिवार का मतलब केवल साथ रहना नहीं था, बल्कि एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा होना था। किसी एक सदस्य का दुख पूरे परिवार का दुख होता था और किसी एक की सफलता पूरे परिवार का उत्सव बन जाती थी। लेकिन आज भारत का सामाजिक ढांचा तेजी से बदल रहा है। आधुनिकता, आर्थिक प्रतिस्पर्धा, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, बदलती जीवनशैली और डिजिटल संस्कृति ने परिवारों के भीतर ऐसी दूरी पैदा कर दी है, जो बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन भीतर से र...