भारत के शैक्षणिक संस्थानों में राजनीति का प्रवेशआज के संदर्भ में कितना उचित या अनुचित? — एक समग्र विश्लेषण
भूमिका शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, सोच, दृष्टि और नेतृत्व क्षमता का निर्माण करने की प्रक्रिया है। विश्वविद्यालय सदैव से बौद्धिक विमर्श, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और लोकतांत्रिक समझ के केंद्र रहे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक भारत की कई महान नेतृत्व क्षमता विश्वविद्यालयों से ही निकली है। लेकिन वर्तमान समय में एक बड़ा प्रश्न उठता है— क्या राजनीति का शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ता प्रभाव शिक्षा के उद्देश्य को सशक्त बना रहा है या कमज़ोर? इसी महत्वपूर्ण प्रश्न का विस्तार से विश्लेषण आगे प्रस्तुत है। भाग 1 — राजनीति का शिक्षा से ऐतिहासिक संबंध भारत के इतिहास में, राजनीति और शिक्षा कभी अलग नहीं रहे। कालखंड शिक्षा और राजनीति संबंध प्राचीन काल गुरुकुलों में धर्म, नीति, राज्य संचालन का ज्ञान नालंदा / तक्षशिला युग वाद-विवाद, तर्कशास्त्र, दर्शनशास्त्र की परंपरा स्वतंत्रता आंदोलन विश्वविद्यालय छात्र आंदोलन के मुख्य केंद्र बने स्वतंत्रता के बाद लोकतांत्रिक चेतना और नागरिक सहभागिता का विकास महात्मा गांधी...