No 370. सार्थक जीवन का पंचसूत्र
संतोष, शांति, सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की खोज प्रस्तावना : मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी खोज मनुष्य ने हजारों वर्षों से एक ही प्रश्न को अलग-अलग रूपों में पूछा है— सुखी जीवन क्या है? किसी ने इसका उत्तर धन में खोजा, किसी ने सत्ता में, किसी ने ज्ञान में, किसी ने परिवार में, किसी ने धर्म में, किसी ने सेवा में और किसी ने आत्मज्ञान में। सभ्यता आगे बढ़ती गई, विज्ञान ने मनुष्य को अभूतपूर्व सुविधाएँ दीं, चिकित्सा ने जीवन की संभावनाएँ बढ़ाईं, संचार ने पूरी दुनिया को एक-दूसरे के करीब ला दिया और तकनीक ने मनुष्य की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा दिया। फिर भी मनुष्य के भीतर बेचैनी, तनाव, असंतोष, अकेलापन और भविष्य की चिंता समाप्त नहीं हुई। यह विरोधाभास विचार करने योग्य है। यदि सुविधा बढ़ने से सुख निश्चित होता, तो आधुनिक मनुष्य को पहले के मनुष्य से कहीं अधिक शांत और संतुष्ट होना चाहिए था। यदि धन ही सुख का अंतिम स्रोत होता, तो अधिक धनवान व्यक्ति सबसे अधिक शांत होता। यदि प्रसिद्धि ही सफलता होती, तो प्रसिद्ध लोगों के जीवन में असुरक्षा नहीं होती। यदि भौतिक वस्तुएँ ही आनंद का आधार होतीं, तो नई वस्तु मिलते ह...