No- 385. जीवन-पथ — शेर और शायरी
1.कर्म से बनती है पहचान, हुनर से निखरता है इंसान, वक़्त चाहे जितना आज़माए, हौसला रखता है इंसान। 2. ठोकरों ने जो सिखाया, वो किताबों में कहाँ, गिरके जो फिर उठ खड़ा हो, असली फ़न है बस वहाँ। 3. मुश्किलों से भागकर कोई मुकाम हासिल नहीं होता, जिसे चलना आता है, उसका सफ़र कभी बेकार नहीं होता। 4. हार को हार मत समझो, ये भी एक पैग़ाम है, जहाँ राह बदलनी पड़े, वहीं से नया मुकाम है। 5. फ़ैसले मुश्किल सही, लेकिन सफ़र रोकते नहीं, जो अपने फ़ैसलों पर टिके रहें, वो कभी झुकते नहीं। 6. वक़्त ने जब आईना दिखाया, अपनी औक़ात समझ आई, सफलता ने जब सिर उठाया, ज़िम्मेदारी साथ आई। 7. धन से घर सज सकता है, जीवन नहीं सँवरता, जब तक उसमें रिश्तों का उजाला नहीं उतरता। 8. रिश्ते मतलब से नहीं, एहसास से निभाए जाते हैं, मुश्किल वक़्त में जो साथ रहें, वही अपने कहलाते हैं। 9. परिवार सिर्फ़ छत नहीं, एक संस्कारों की ज़मीन है, जहाँ जड़ें मज़बूत हों, वहीं उड़ान हसीन है। 10. धर्म अगर माथे की रेखा है, तो कर्म उसकी पहचान, पूजा से पहले आचरण देखता है भगवान। 11. इबादत सिर्फ़ सजदे में हो, ये ज़रूरी तो नहीं, ...