शून्य और दशमलव प्रणाली: प्राचीन भारत से आधुनिक गणित तक भारत का वैश्विक योगदान
मानव सभ्यता के विकास का इतिहास ज्ञान और विज्ञान की निरंतर खोज का इतिहास है। इस खोज में गणित का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गणित वह भाषा है जिसके माध्यम से हम प्रकृति, विज्ञान, तकनीक, अर्थव्यवस्था और ब्रह्मांड को समझते हैं। आधुनिक विज्ञान की लगभग हर शाखा—भौतिकी, खगोलशास्त्र, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान, अर्थशास्त्र और अंतरिक्ष अनुसंधान—गणितीय सिद्धांतों पर आधारित है। लेकिन आधुनिक गणित का जो स्वरूप आज दुनिया के सामने है, उसकी नींव बहुत हद तक भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में रखी गई थी। विशेष रूप से शून्य (0) और दशमलव प्रणाली (Decimal System) की खोज ने गणित की दिशा और संरचना को पूरी तरह बदल दिया। 1. आज हम जिन संख्याओं का उपयोग करते हैं—0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9—वे केवल अंक नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी गणितीय क्रांति का प्रतीक हैं जिसने पूरी दुनिया के ज्ञान को सरल और व्यवस्थित बना दिया। यह प्रणाली स्थान-मान (Place Value) के सिद्धांत पर आधारित है और इसका विकास भारत में हुआ। इस शोध लेख का उद्देश्य है— शून्य और दशमलव प्रणाली की उत्पत्ति का अध्ययन प्राचीन भारत के गणितीय विकास की समी...