मैं अकेला नहीं हूँ. . (पिता और हर संघर्षशील आत्मा को समर्पित)
मैं अकेला नहीं हूँ, यह जीवन का सत्य पुराना है, हर सूनी राह के पीछे एक नया तराना है। रात अगर है गहरी तो भोर भी आनी है, पीड़ा की हर धड़कन में शक्ति छुपी कहानी है। मैं अकेला नहीं हूँ… जब प्रेम नहीं मिलता मन को, जब अपनों से घाव मिले, जब सम्मान छिन जाए सारा, जब सपने भी पाँव तले— तब मत समझो जीवन नीरस, मत मानो सब शून्य हुआ, यहीं से तो रस फूटेगा, यहीं से व्यक्तित्व हुआ। तिरस्कार की ज्वाला ही अंतर को तपाती है, अभावों की कठोर धरा ही हीरे उपजाती है। संघर्षों की आँधी में ही साहस पंख पसारता है, जो गिरकर फिर उठ जाता है वही जग में निखरता है। मैं अकेला नहीं हूँ… क्या डॉ. भीमराव अंबेडकर को सम्मान सहज मिल पाया था? नहीं— अपमानों की राख से उन्होंने युग का दीप जलाया था। क्या ए. पी. जे. अब्दुल कलाम को वैभव ने थामा था? नहीं— अभावों की मिट्टी से ही उन्होंने आकाश को छुआ था। क्या नेल्सन मंडेला ने सरल जीवन पाया था? नहीं— कैद की सलाखों से ही स्वतंत्रता का सूरज लाया था। क्या स्वामी विवेकानंद को जग ने तुरंत अपनाया था? नहीं— उपेक्षा की धूल से ही विश्व-विजय का शंख बजाया था। तो फिर मैं क्यों घबराऊँ? क्यों अपने भाग्य क...