सुनो, सीखो, लिखो और जियो : ज्ञान को जीवन में उतारने की साधना
प्रस्तावना : ज्ञान का संग्रह नहीं, ज्ञान का संस्कार मनुष्य का जीवन केवल समय बिताने के लिए नहीं है; यह आत्म-विकास, आत्म-निर्माण और आत्म-उत्कर्ष की यात्रा है। हम प्रतिदिन अनेक बातें सुनते हैं, अनेक दृश्य देखते हैं और अनेक अनुभवों से सीखते हैं। संसार एक विशाल विश्वविद्यालय है और हर दिन उसका नया पाठ है। किन्तु प्रश्न यह है कि— क्या हम उस पाठ को केवल सुनकर आगे बढ़ जाते हैं? क्या हम उस प्रेरणा को केवल उस क्षण तक सीमित रख देते हैं? सच्चाई यह है कि जो ज्ञान जीवन में उतरता नहीं, वह धीरे-धीरे स्मृति से मिट जाता है। इसलिए आवश्यक है कि जो भी अच्छा सुनें, अच्छा देखें, अच्छा सीखें—उसे केवल मन में न रखें, बल्कि उसे लिखें, पढ़ें और जिएँ। अच्छा सुनना : विवेकपूर्ण श्रवण की कला सुनना एक साधना है। कानों से सुनना सरल है, पर हृदय से सुनना दुर्लभ है। आज सूचना का विस्फोट है। हर क्षण मोबाइल, समाचार, सोशल मीडिया और चर्चाएँ हमारे सामने हैं। परंतु हर बात ज्ञान नहीं होती। इसलिए पहला चरण है—विवेकपूर्ण चयन। जो बातें हमारे चरित्र को ऊँचा उठाएँ, जो प्रेरणा दें, जो जीवन को दिशा दें—उन्हें ग्रहण करें। अच्छे प्रवचन, प्रे...