No- 366. जीवन एक रणभूमि है
जीवन एक रणभूमि है, तुमको बनना होगा वीर। सत्य बने संकल्प तुम्हारा, कर्म बने शमशीर।। हर प्रभात रणभेरी बजती, हर पल नई पुकार, संघर्षों की अग्नि में तपकर, होता जीवन साकार। धूप तपाए, आँधी गरजे, वर्षा बरसाए तीर, अटल हिमालय-सा जो डट जाए, वही सच्चा रणवीर।। राह कठिन हो, पाँव लहूलुहान हों, फिर भी मत रुकना, अँधियारे के बीच खड़े होकर, दीपक बनकर जलना। गिरना यदि जीवन की रीति है, उठना वीरों का धर्म, जो हर हार से सीख लेता, वही रचता नव कर्म।। सबसे बड़ा समर जगत में, अपने मन से होता, लोभ, मोह, भय, क्रोध हराकर, मानव ऊँचा होता। जिसने अपने मन को जीता, जीत लिया संसार, उसके चरणों में झुक जाता, यश, वैभव, सत्कार।। नदी नहीं पूछे पथ कैसा, बहना उसका काम, सूरज कभी नहीं थकता है, देना उसका दान। वटवृक्षों ने आँधी झेली, तब पाया सम्मान, प्रकृति सिखाती है हर पल—संघर्षों का ज्ञान।। धन, दौलत, पद, मान, प्रतिष्ठा, सब रह जाएँ यहीं, साथ चलें बस पुण्य कर्म, और चरित्र की रोशनी। सेवा जिसकी साधना हो, सत्य जिसका प्राण, ऐसे मानव के जीवन से, जग पाता सम्मान।। यह जीवन केवल अपना नहीं, युग का है उपहार, रोते चेहरे ...