No- 386. ₹20,000 से शुरू हुई वह कहानी, जिसने Emami को बनाया


आर.एस. अग्रवाल की उद्यमिता, दोस्ती और अवसर पहचानने की कहानी

✍️ राकेश मिश्र

कभी-कभी किसी बड़े कारोबारी साम्राज्य की कहानी पढ़ते हुए मेरी नजर उसके वर्तमान आकार पर नहीं, बल्कि उसकी शुरुआत पर ठहर जाती है।

सोचिए—एक तरफ सुरक्षित नौकरी, दूसरी तरफ अपना कारोबार शुरू करने का अनिश्चित रास्ता। एक तरफ सीमित संसाधन, दूसरी तरफ बड़ा सपना।

और पूंजी?

सिर्फ ₹20,000 के आसपास।

यहीं से शुरू होती है राधेश्याम अग्रवाल, यानी आर.एस. अग्रवाल, और उनके बचपन के मित्र आर.एस. गोयनका की कहानी।

आज Emami भारत के चर्चित कारोबारी समूहों में शामिल है। लेकिन इस कहानी को समझने के लिए हमें आज से लगभग पाँच दशक पीछे, 1974 के कोलकाता में जाना होगा।

दो दोस्तों का एक सपना

आर.एस. अग्रवाल का जन्म 18 फरवरी 1946 को कोलकाता में हुआ। उनका परिवार राजस्थान के बीकानेर से जुड़ा हुआ था। शिक्षा को उन्होंने गंभीरता से लिया। St. Xavier's College, Kolkata से पढ़ाई के बाद उन्होंने वाणिज्य और कानून की शिक्षा प्राप्त की और Chartered Accountant तथा Company Secretary की पेशेवर योग्यता हासिल की।

उनके बचपन के मित्र थे आर.एस. गोयनका।

दोनों साथ पढ़े, साथ खेले और आगे चलकर दोनों ने अपने-अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत बिरला समूह से जुड़े प्रतिष्ठानों में की।

यहाँ कहानी सामान्य तरीके से आगे बढ़ सकती थी।

अच्छी नौकरी, अच्छा पद और सुरक्षित भविष्य।

लेकिन दोनों के मन में कुछ और था।

वे अपना व्यवसाय करना चाहते थे।

मुझे इस कहानी का यही हिस्सा सबसे दिलचस्प लगता है।

उद्यमिता की शुरुआत अक्सर बैंक खाते में मौजूद रकम से नहीं होती। वह पहले मन में जन्म लेती है।

दोनों ने नौकरी की सुरक्षा के बजाय अपने सपने पर भरोसा किया।

और 1974 में उस सपने को कारोबार का रूप दे दिया।

जब ₹20,000 ही शुरुआती पूंजी थी

आज हम स्टार्टअप की बात करते हैं तो करोड़ों रुपये की funding, investors, valuation और technology की चर्चा होती है।

लेकिन Emami की शुरुआती कहानी इन सबसे अलग थी।

लगभग ₹20,000 की पूंजी से दोनों ने कॉस्मेटिक्स और आयुर्वेदिक उत्पादों के कारोबार की शुरुआत की।

उस समय भारतीय बाजार आज जैसा खुला और प्रतिस्पर्धी नहीं था। कॉस्मेटिक्स के क्षेत्र में आयात, शुल्क और सीमित विकल्प जैसी अनेक चुनौतियाँ थीं।

लेकिन हर चुनौती में एक अवसर भी छिपा होता है।

अग्रवाल और गोयनका ने भारतीय उपभोक्ता को समझने की कोशिश की।

उन्होंने उत्पाद बनाए और उन्हें बाजार तक पहुँचाने के लिए खुद मेहनत की।

कंपनी के इतिहास से जुड़ी जानकारी के अनुसार शुरुआती दिनों में वे अपने उत्पादों को हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे तक पर लेकर बाजार में जाते थे।

आज के समय में यह दृश्य शायद किसी फिल्म का हिस्सा लगे।

लेकिन यहीं से असली कारोबार शुरू हुआ था।

कारोबार का पहला विश्वविद्यालय—बाजार

मेरे लिए इस कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है कि किसी भी उद्यमी का पहला विश्वविद्यालय उसका बाजार होता है।

किताबें हमें व्यवसाय के सिद्धांत सिखा सकती हैं।

Management school हमें strategy समझा सकता है।

लेकिन ग्राहक हमें बताता है कि वास्तव में क्या बिकता है।

शुरुआती दिनों में खुद बाजार में उतरने का फायदा यही था कि दोनों संस्थापकों को उपभोक्ता की वास्तविक जरूरत समझने का अवसर मिला।

कौन-सा उत्पाद पसंद किया जा रहा है?

किस कीमत पर ग्राहक खरीदना चाहता है?

दुकानदार किस ब्रांड को जगह देना चाहता है?

किस तरह की packaging ग्राहक का ध्यान खींचती है?

इन सवालों के जवाब किसी boardroom में नहीं, बाजार में मिलते हैं।

Himani में छिपा अवसर

फिर आया 1978।

Emami ने Himani Limited का अधिग्रहण किया।

उस समय Himani कठिन कारोबारी दौर से गुजर रही थी।

लेकिन किसी व्यवसाय को केवल उसकी वर्तमान स्थिति से देखना और उसकी संभावित क्षमता को देखना—इन दोनों में बड़ा अंतर होता है।

यहीं उद्यमी की दृष्टि काम आती है।

Himani के माध्यम से Emami को आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय उत्पादों की दुनिया से जुड़ने का अवसर मिला।

आज पीछे मुड़कर देखने पर यह फैसला Emami की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव दिखाई देता है।

BoroPlus और Navratna ने बनाई पहचान

फिर आया वह दौर जब Emami ने ऐसे ब्रांड बनाए जो धीरे-धीरे भारतीय घरों में पहचाने जाने लगे।

1982 में BoroPlus Antiseptic Cream लॉन्च हुआ।

इसके बाद Navratna ने cooling oil की श्रेणी में अपनी पहचान बनाई।

इन ब्रांडों की सफलता का एक पहलू मुझे खास तौर पर महत्वपूर्ण लगता है।

उन्होंने भारतीय उपभोक्ता की रोजमर्रा की जरूरत को समझा और उसे मजबूत branding के साथ जोड़ा।

यानी केवल उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं था।

उत्पाद को लोगों की आदत और विश्वास का हिस्सा बनाना था।

यही किसी brand की असली ताकत होती है।

दो दोस्तों की साझेदारी

आर.एस. अग्रवाल और आर.एस. गोयनका की कहानी को केवल व्यवसाय की दृष्टि से देखना भी अधूरा होगा।

यह दोस्ती और साझेदारी की कहानी भी है।

बचपन के दो दोस्त।

समान पेशेवर पृष्ठभूमि।

अलग-अलग कारोबारी अनुभव।

और फिर एक साथ अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय।

लंबे समय तक किसी साझेदार के साथ काम करना आसान नहीं होता। कारोबार में मतभेद होंगे, जोखिम होंगे, निर्णयों पर असहमति होगी और कठिन समय भी आएगा।

लेकिन एक मजबूत partnership की पहचान यही है कि व्यक्तिगत संबंध और व्यावसायिक जिम्मेदारी दोनों को संतुलित किया जा सके।

Emami की कहानी में यह साझेदारी अपने आप में अध्ययन का विषय है।

एक कंपनी से एक समूह तक

Emami धीरे-धीरे केवल cosmetics या FMCG कंपनी नहीं रही।

समय के साथ समूह ने edible oil, paper and packaging board, real estate, retail, healthcare और अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार किया।

2008 में Zandu Pharmaceutical Works का अधिग्रहण भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

यहाँ एक बार फिर वही बात दिखाई देती है—अवसर को पहचानना और उसे अपने कारोबारी मॉडल से जोड़ना।

एक उद्यमी के लिए growth का अर्थ हमेशा केवल ज्यादा उत्पाद बेचना नहीं होता।

कभी growth का अर्थ नई category में जाना होता है।

कभी किसी स्थापित brand को अपने portfolio में जोड़ना।

और कभी अपने संगठन को इस तरह विकसित करना कि वह संस्थापक के व्यक्तिगत प्रयास से आगे बढ़कर एक संस्था बन जाए।

असली सफलता क्या है?

जब हम किसी सफल उद्योगपति की कहानी पढ़ते हैं तो अक्सर हमारा ध्यान उनके कारोबार के आकार, संपत्ति या बाजार मूल्य पर चला जाता है।

लेकिन मुझे लगता है कि किसी उद्यमी की कहानी को केवल इन आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता।

आर.एस. अग्रवाल की यात्रा का असली महत्व उस निर्णय में है, जब उन्होंने और उनके मित्र आर.एस. गोयनका ने सुरक्षित नौकरी से आगे देखने का साहस किया।

उन्होंने यह नहीं कहा कि हमारे पास बहुत बड़ी पूंजी है, इसलिए हम कारोबार करेंगे।

उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की।

उन्होंने बाजार में जाकर सीखा।

उन्होंने संकटग्रस्त व्यवसाय में संभावना देखी।

उन्होंने ब्रांड बनाए।

उन्होंने अधिग्रहण किए।

और धीरे-धीरे एक व्यवसाय को एक बड़े संस्थान में बदलने की दिशा में आगे बढ़े।

कोलकाता से निकली एक बड़ी सीख

कोलकाता की मिट्टी ने देश को कला, साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता और उद्योग के क्षेत्र में अनेक नाम दिए हैं।

आर.एस. अग्रवाल और आर.एस. गोयनका की कहानी इसी शहर की कारोबारी विरासत का एक आधुनिक अध्याय है।

इस कहानी को पढ़ते हुए मुझे बार-बार एक बात महसूस होती है—

बड़ी शुरुआत के लिए हमेशा बड़ा संसाधन जरूरी नहीं होता।

जरूरी है कि व्यक्ति को अपनी क्षमता पर विश्वास हो।

उसे बाजार की समझ हो।

वह जोखिम को समझते हुए निर्णय ले सके।

और सबसे महत्वपूर्ण—वह छोटे कदमों को लगातार आगे बढ़ाने का धैर्य रखता हो।

₹20,000 से शुरू हुई Emami की कहानी इसलिए केवल एक कारोबारी सफलता की कहानी नहीं है।

यह उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो अपने भीतर कोई विचार लेकर बैठे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण पहला कदम उठाने से डरते हैं।

शायद हर बड़ा व्यवसाय करोड़ों से शुरू नहीं होता।

कभी-कभी वह सिर्फ एक विचार से शुरू होता है।

कभी दो दोस्तों के विश्वास से।

और कभी—

₹20,000 से।

यही आर.एस. अग्रवाल की कहानी का सबसे दिलचस्प अध्याय है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आज के दौर में मानवता की प्रासंगिकता

Consistency Se Zero Se Banta Hai Hero

🇮🇳 "भारत अपनी बेटियों पर गर्व करता है" 🇮🇳 ✍️With Respect & Pride— Rakesh Mishra