No- 383. जीवन-पथ
कर्म मनुज को ऊँचा करता,
अनुशासन देता आधार,
सीख निरंतर साथ रहे तो
निखर उठे जीवन-व्यवहार।
संघर्षों से धैर्य मिलता,
ठोकर देती नई समझ,
हार कभी अंतिम नहीं होती,
वहीं से मिलती नई राह।
निर्णय लेकर बढ़ना सीखो,
भय को मन से दूर करो,
अपने बल पर खड़े रहो और
अपने श्रम पर गर्व करो।
समय सिखाता सीमा अपनी,
सफलता दे उत्तरदायित्व,
धन जीवन का साधन भर है,
उससे बड़ा मनुष्य का मूल्य।
धर्म वही जो कर्म में उतरे,
वाणी में ही धर्म न हो,
सेवा वह जो काम किसी के,
केवल अपना यश न हो।
संबंधों की डोर सँभालो,
विश्वासों का मान करो,
परिवार मिले तो केवल
सुख नहीं—संस्कार भरो।
जीवन में जो लोग मिलें,
सब कुछ देकर जाते हैं—
कोई धैर्य, कोई विश्वास,
कोई निर्णय सिखलाते हैं।
कोई कठिन घड़ी में आकर
जीवन का अर्थ समझाता है,
कोई छोटी-सी जिम्मेदारी से
मन को बड़ा बनाता है।
सफलता जब द्वार खटखटाए,
मन में विनय बनाए रखना,
जितना ऊँचा उठते जाओ,
उतना धरती से जुड़े रहना।
कभी ठहरकर स्वयं से पूछो—
क्या रिश्तों का मान रखा?
क्या परिवार को साथ लेकर
जीवन का हर पथ पार किया?
क्या विपदा में धैर्य बचा था?
क्या सुख में विनम्र रहे?
क्या धन को साधन ही माना,
या उसके पीछे चलते रहे?
क्या अपनी सामर्थ्य का कुछ अंश
दूसरों के हित में दिया?
क्या अपने अनुभव से किसी को
आगे बढ़ने का अवसर दिया?
कठिन समय हो—कर्म न छूटे,
गलती हो—तो सीख मिले,
हार मिले तो मन न टूटे,
पथ को फिर से दिशा मिले।
सुख आए तो गर्व न करना,
दुःख आए तो टूट न जाना,
जीवन की हर बदलती ऋतु में
अपना संतुलन बनाए रखना।
धर्म मिले तो उसे निभाना,
सेवा मिले तो हाथ बढ़ाना,
सामर्थ्य मिले तो उसका कुछ भाग
जनहित में अर्पित कर जाना।
और यदि तुम आगे बढ़ जाओ,
एक बात फिर याद रहे—
जिस पथ ने तुमको आगे लाया,
उस पर औरों के पग भी बढ़ें।
अपने लिए राह बनाना
जीवन का संघर्ष है,
उस राह पर आगे बढ़ जाना
जीवन का उत्कर्ष है।
पर अपने पीछे आने वालों के
लिए राह सरल कर जाना,
जहाँ तुम्हें पत्थर मिले थे,
वहाँ एक दीप जला जाना।
जो पाया, उसका मान करो,
जो सीखा, वह बाँट चलो,
जिनसे जीवन राह मिली है,
उनका ऋण भी साध चलो।
जीवन केवल अपने सुख का
नाम नहीं, विस्तार भी है;
अपने हिस्से की रोशनी से
दूसरों का उजियार भी है।
कर्म से जीवन आकार पाता,
अनुशासन देता उसे सँवार,
संबंध उसे समृद्ध बनाते,
धर्म दिखाता सही विचार।
सेवा देती जीवन को अर्थ,
त्याग उसे विस्तार देता,
और किसी को आगे बढ़ाना
जीवन को नया आकार देता।
अंततः इतना ही शेष रहे—
जब जीवन की संध्या आए,
पीछे मुड़कर मन यह कह पाए—
जो पाया, उससे कुछ दे पाए।
कुछ रिश्ते बचाए, कुछ मन जीते,
कुछ दीप अँधेरों में जलाए,
और अपने बाद आने वालों के
लिए कुछ कदम आसान बनाए।
अपने लिए राह बनाना संघर्ष है,
उस राह पर चलना जीवन है;
और राह को बेहतर छोड़ जाना—
शायद जीवन का सबसे सुंदर अर्थ है।
यही कर्म की सच्ची गरिमा,
यही मनुष्य की पहचान—
चलते रहना, साथ बढ़ाना,
यही जीवन-पथ, यही सम्मान।
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