No- 379. राकेश मिश्रा के 200 शेर और शायरियाँ
दिल भी रहे, तेवर भी रहे और बात दिल तक भी पहुँचे
खंड 1 — जिंदगी और संघर्ष
1.
हालातों ने सिखाया है हालातों से लड़ना,
गिरना कोई हार नहीं, फिर उठकर आगे बढ़ना।
2.
ठोकरों ने मेरे कदमों को कमजोर नहीं किया,
हर गिरावट ने मुझे पहले से बेहतर किया।
3.
रास्ते मुश्किल थे तो हौसला बढ़ता गया,
मैं चलता रहा और रास्ता बनता गया।
4.
किस्मत के भरोसे बैठना मुझे आया नहीं,
जो चाहिए था, उसे मेहनत से पाया सही।
5.
वक्त ने कई बार मेरी परीक्षा ली,
हर बार मैंने जिंदगी की नई किताब पढ़ी।
6.
जो दर्द मिला उसे मुस्कान में ढाल दिया,
जिंदगी ने जो दिया, उसे कमाल में ढाल दिया।
7.
मैं थका जरूर हूँ, मगर रुका नहीं हूँ,
अभी सफर बाकी है, मैं झुका नहीं हूँ।
8.
कुछ सपने टूटे, कुछ नए बन गए,
हम जिंदगी के साथ-साथ खुद भी बदल गए।
9.
मुश्किलें आईं तो डरने की बजाय सोचने लगा,
रास्ता बंद मिला तो रास्ता खोजने लगा।
10.
मेरी कहानी आसान नहीं, मगर मेरी है,
हर दर्द के पीछे कोई सीख खड़ी है।
11.
मैंने अंधेरों से दोस्ती कर ली एक दिन,
तभी तो उजाले की कीमत समझ आई।
12.
जिंदगी ने पूछा—कितना चल सकते हो?
मैंने कहा—जब तक सांस है, तब तक।
13.
हार सामने खड़ी थी, मैंने हाथ मिला लिया,
उसे सबक बनाया और रास्ता बना लिया।
14.
कदम छोटे सही, मगर दिशा सही रखी,
इसीलिए जिंदगी में उम्मीद सही रखी।
15.
वक्त खराब था तो लोग भी बदल गए,
अच्छा हुआ—चेहरे कई पहचान में आ गए।
खंड 2 — स्वाभिमान और व्यक्तित्व
16.
झुकना मुझे आता है, मगर सही जगह पर,
समझौता नहीं करता अपने स्वाभिमान पर।
17.
मेरी पहचान किसी सहारे की मोहताज नहीं,
मेरी मेहनत ही मेरी सबसे बड़ी गवाही है।
18.
मैं किसी की परछाई बनकर नहीं चलता,
अपनी धूप में जलकर अपना चेहरा बनाता हूँ।
19.
किसी की नकल करके ऊँचा होना नहीं आता,
मुझे अपना रास्ता खुद बनाना आता है।
20.
नाम छोटा हो या बड़ा, फर्क नहीं पड़ता,
किरदार छोटा नहीं होना चाहिए।
21.
मेरी खामोशी को कमजोरी मत समझना,
मैं जवाब शब्दों से कम, परिणामों से देता हूँ।
22.
मुझे हर किसी की पसंद बनने का शौक नहीं,
मैं अपने सिद्धांतों से समझौता करने वाला नहीं।
23.
कद आदमी का कपड़ों से नहीं होता,
किरदार से होता है।
24.
मैं अपनी कीमत तालियों से नहीं आंकता,
मुझे पता है मैं किस मिट्टी का बना हूँ।
25.
जो हूँ वही दिखता हूँ, यही मेरी पहचान है,
न कोई मुखौटा है, न कोई दूसरा इंसान है।
26.
दुनिया चाहे मुझे देर से पहचाने,
मैं खुद को पहचान चुका हूँ।
27.
मैंने नाम के पीछे दौड़ना छोड़ दिया,
अब काम ऐसा करना है कि नाम पीछे आए।
28.
मेरी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं,
हर दिन अपने पुराने रूप से है।
29.
स्वाभिमान बचा रहे तो हार भी मंजूर है,
आत्मा बेचकर मिली जीत किस काम की?
30.
राकेश मिश्रा हूँ—इतना ही परिचय काफी है,
बाकी मेरी जिंदगी मेरी गवाही है।
खंड 3 — सफलता और लक्ष्य
31.
मंजिल की चाह है मगर सफर से प्यार है,
हर कदम में छिपा मेरा अपना संसार है।
32.
सपने आँखों में अच्छे लगते हैं,
मगर पसीने में उतरें तो इतिहास बनते हैं।
33.
मैं आज की जीत पर रुकने वाला नहीं,
कल की चुनौती का इंतजार है मुझे।
34.
काम ऐसा करो कि परिचय देना न पड़े,
नतीजे बोलें और दुनिया सुनने लगे।
35.
मेहनत की स्याही से तकदीर लिखता हूँ,
मैं आने वाले कल की तस्वीर लिखता हूँ।
36.
मुझे मंजिल से ज्यादा मकसद प्यारा है,
क्योंकि मकसद में दूसरों का भी सहारा है।
37.
उड़ान बड़ी हो तो जमीन याद रखना,
कामयाबी मिले तो इंसानियत याद रखना।
38.
मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ मगर अकेला नहीं,
मेरे साथ चलने वालों का भी भविष्य चाहिए।
39.
मेरा सपना सिर्फ मेरा सपना नहीं रहेगा,
एक दिन किसी और की उम्मीद बनेगा।
40.
आज मेहनत है, कल पहचान होगी,
आज खामोशी है, कल मेरी बात होगी।
खंड 4 — दोस्ती
41.
दोस्ती चेहरे से नहीं, दिल से पहचानी जाती है,
सच्ची यारी वक्त के साथ और गहरी हो जाती है।
42.
कुछ दोस्त जिंदगी की दौलत होते हैं,
उनके साथ बिताए पल ही असली दौलत होते हैं।
43.
दोस्त वही जो भीड़ में हाथ थाम ले,
और अकेले में हमारी गलती बता दे।
44.
यारों की महफिल में हिसाब नहीं होता,
वहाँ दिल होता है, कोई किताब नहीं होता।
45.
कुछ लोग मिलते हैं और याद बन जाते हैं,
कुछ दोस्त मिलते हैं और परिवार बन जाते हैं।
46.
दूरी कितनी भी हो, दोस्ती कम नहीं होती,
सच्चे रिश्तों में मुलाकात जरूरी नहीं होती।
47.
जिस दोस्ती में स्वार्थ नहीं होता,
उससे खूबसूरत कोई रिश्ता नहीं होता।
48.
पुराने दोस्त मिल जाएँ तो उम्र लौट आती है,
एक हँसी में पूरी जवानी याद आती है।
49.
दोस्त कम हैं, मगर कमाल के हैं,
मुश्किल में खड़े रहते हैं, सवाल नहीं करते।
50.
दोस्ती का मतलब सिर्फ साथ चलना नहीं,
जरूरत पड़े तो साथ खड़ा होना है।
खंड 5 — परिवार
51.
दुनिया चाहे जितनी खूबसूरत क्यों न हो,
घर लौटने की खुशी सबसे अलग होती है।
52.
घर छोटा हो या बड़ा, फर्क नहीं पड़ता,
जहाँ अपनों की हँसी हो, वही घर होता है।
53.
माँ-बाप की दुआ से बड़ी कोई दौलत नहीं,
उनकी छाँव से खूबसूरत कोई जन्नत नहीं।
54.
बच्चों की मुस्कान में अपना कल देखता हूँ,
उनके सपनों में अपना भविष्य देखता हूँ।
55.
कमाया बहुत कुछ, मगर सबसे बड़ा खजाना घर है,
दुनिया चाहे जितनी बड़ी हो, अपना परिवार बेहतर है।
56.
जिंदगी की भागदौड़ में इतना याद रखना,
कमाने की दौड़ में अपनों को मत खो देना।
57.
परिवार साथ हो तो मुश्किल भी छोटी लगती है,
अपनों की एक आवाज जिंदगी बदल देती है।
58.
बच्चों को सिर्फ दौलत मत देना,
उन्हें संस्कार और आत्मविश्वास भी देना।
59.
घर की शांति बाजार में नहीं मिलती,
अपनों की मोहब्बत किसी दुकान में नहीं मिलती।
60.
मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि अगर कोई पूछे,
तो मैं अपने परिवार की मुस्कान बताऊँगा।
खंड 6 — प्रेम और जीवनसाथी
61.
साथ वही नहीं जो हाथ पकड़कर चले,
साथ वह है जो मुश्किल में मन संभाले।
62.
मोहब्बत सिर्फ कह देने का नाम नहीं,
उम्र भर निभाने का नाम है।
63.
जिससे अपने दुख कहने में डर न लगे,
वही रिश्ता जिंदगी का सबसे सुंदर रिश्ता है।
64.
जिंदगी की धूप में जो छाँव बनकर साथ रही,
वही मेरे सफर की सबसे खूबसूरत बात रही।
65.
कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं समझाए जाते,
बस महसूस किए जाते हैं और निभाए जाते हैं।
66.
प्यार में हिसाब हो तो रिश्ता व्यापार हो जाता है,
जहाँ अपनापन हो, वही सच्चा प्यार होता है।
67.
तुम साथ रहो तो सफर आसान लगता है,
वरना मंजिल भी कभी-कभी वीरान लगती है।
68.
मोहब्बत चेहरे की खूबसूरती नहीं देखती,
वो दिल में छिपी सच्चाई देखती है।
69.
एक अच्छा साथी जिंदगी बदल सकता है,
एक सच्चा साथ इंसान को संभाल सकता है।
70.
जिसे देखकर दिल को सुकून मिले,
उसे जिंदगी से दूर नहीं करना चाहिए।
खंड 7 — कवि का दिल
71.
मैं पत्थर नहीं हूँ, मेरे भीतर भी एहसास है,
आँखों में खामोशी है, मगर दिल में आवाज है।
72.
दूसरों का दर्द देखकर जो दिल भर आता है,
समझो वही इंसान कहलाने के काबिल हो जाता है।
73.
किसी की आँख में आँसू देखकर मुस्कुरा न सका,
शायद इसलिए दुनिया जैसा बन न सका।
74.
मेरे पास शब्द हैं, हर दर्द का इलाज नहीं,
कभी किसी के पास बैठना ही काफी है।
75.
दिल से निकली बात दिल तक पहुँच जाती है,
सच्ची संवेदना बिना शब्दों के समझ आती है।
76.
मैं जीतकर भी अगर किसी को हरा दूँ,
तो ऐसी जीत को जीत कैसे कह दूँ?
77.
कवि का दिल है साहब, हिसाब नहीं रखता,
जो अपना लगे उसके लिए समय नहीं देखता।
78.
दर्द अपना हो तो हर कोई रो लेता है,
दूसरे का दर्द महसूस करे वही बड़ा होता है।
79.
मेरी कलम सिर्फ मेरी कहानी नहीं लिखती,
जहाँ दर्द दिखता है वहाँ आवाज भी लिखती है।
80.
दिल में थोड़ी नमी बचाकर रखना दोस्तों,
जिंदगी हर दिन पत्थर बनने को मजबूर करती है।
खंड 8 — प्रेम, विरह और तन्हाई
81.
कुछ लोग दूर होकर भी दिल के पास रहते हैं,
कुछ पास होकर भी बहुत दूर रहते हैं।
82.
यादों का भी अपना अजीब कारोबार है,
जिसे भूलना चाहो वही बार-बार याद आता है।
83.
रात खामोश थी, मगर दिल बोलता रहा,
एक चेहरा था जो आँखों में डोलता रहा।
84.
हमने मोहब्बत में इतना ही सीखा है,
जिसे चाहो उसे खुश देखना भी प्यार है।
85.
हर बिछड़ना अंत नहीं होता,
कुछ रिश्ते दूरी में भी जिंदा रहते हैं।
86.
कभी-कभी खामोशी भी खत लिखती है,
बस पढ़ने वाला दिल चाहिए।
87.
तन्हाई से अब डर नहीं लगता मुझे,
क्योंकि उसमें खुद से मिलने का मौका मिलता है।
88.
जिसे दिल से चाहा उसे बांध नहीं सकते,
मोहब्बत है साहब, कैद नहीं कर सकते।
89.
कुछ यादें उम्र भर साथ चलती हैं,
बिना आवाज के भी बहुत कुछ कहती हैं।
90.
दिल टूटा तो आवाज नहीं हुई,
बस एक इंसान थोड़ा और समझदार हो गया।
खंड 9 — मंच और महफिल
91.
मंच पर शब्द नहीं, विचार उतरने चाहिए,
भाषण खत्म हो मगर सवाल रहने चाहिए।
92.
तालियों की आवाज अच्छी लगती है जरूर,
मगर किसी की जिंदगी बदल जाए तो उससे बड़ा सुर नहीं।
93.
बात ऐसी कहो जो दिल में उतर जाए,
आवाज खत्म हो मगर असर रह जाए।
94.
महफिल में आया हूँ तो दिल की बात कहूँगा,
जो सच लगेगा वही कहूँगा।
95.
तालियों से ज्यादा मुझे विश्वास चाहिए,
मेरी बात सुनने वालों के दिल में एहसास चाहिए।
96.
शायरी वही जो दिल को छूकर जाए,
शेर वही जो सुनने वाले को अपना सा लग जाए।
97.
मंच बड़ा नहीं होता, विचार बड़ा होता है,
वक्ता नहीं, उसका उद्देश्य बड़ा होता है।
98.
शब्दों की कीमत तभी है जब उनमें सच्चाई हो,
आवाज की कीमत तभी है जब उसमें अच्छाई हो।
99.
महफिल में रोशनी बहुत देखी है मैंने,
कभी किसी के दिल का दिया भी जलाइए।
100.
आज मेरी बात पर तालियाँ न भी बजें,
बस किसी एक दिल में जगह बन जाए।
खंड 10 — सम्मान और अभिनंदन
101.
सम्मान फूलों से नहीं, भावनाओं से होता है,
किसी का आदर करना ही संस्कार होता है।
102.
जिसने जीवन दूसरों के नाम किया,
आज उसी के नाम ये सम्मान किया।
103.
किसी की उपलब्धि पर दिल से खुश होना सीखिए,
दूसरों की रोशनी में अपना उजाला देखिए।
104.
फूल मुरझा जाएंगे, शब्द भी खो जाएंगे,
मगर अच्छे कर्म हमेशा याद आएंगे।
105.
सम्मान उस कर्म का है जो समाज को दिशा दे,
सम्मान उस जीवन का है जो दूसरों के काम आए।
106.
आज सम्मान आपका है, मगर गौरव हमारा है,
आप जैसे लोगों का होना ही समाज का सहारा है।
107.
जिसने मुश्किल में भी मुस्कुराना नहीं छोड़ा,
वास्तव में उसी ने जिंदगी को जीना सीखा।
108.
किसी को सम्मान देना खुद सम्मानित होना है,
क्योंकि आदर करने वाला दिल ही बड़ा होता है।
खंड 11 — समाज और इंसानियत
109.
समाज वही आगे बढ़ता है जहाँ लोग साथ चलते हैं,
सिर्फ अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए भी जीते हैं।
110.
इंसानियत बची रहे तो बहुत कुछ बचा रहेगा,
दिल जिंदा रहे तो इंसान जिंदा रहेगा।
111.
किसी गरीब की आँख में उम्मीद बनकर देखो,
जिंदगी का अर्थ शायद वहीं समझ आएगा।
112.
भूखे को भोजन और निराश को उम्मीद दे दो,
यही इंसानियत की सबसे बड़ी पूजा है।
113.
मंदिर-मस्जिद बहुत देखे हैं दुनिया में,
कभी किसी जरूरतमंद के दिल में उतरकर देखिए।
114.
बड़ा वह नहीं जिसके पास बहुत कुछ है,
बड़ा वह है जो अपने पास से कुछ दे सकता है।
115.
समाज बदलने से पहले खुद को बदलना होगा,
आईना दूसरों को दिखाने से पहले खुद को देखना होगा।
116.
किसी की मजबूरी पर हँसना मत,
वक्त किसी को भी कहीं खड़ा कर सकता है।
117.
जिस हाथ ने कभी मदद की हो किसी की,
वही हाथ जिंदगी में सबसे खूबसूरत है।
खंड 12 — राष्ट्र और भारत
118.
देश सिर्फ नक्शे पर बनी एक लकीर नहीं,
करोड़ों दिलों की धड़कन का नाम है भारत।
119.
वतन से प्रेम सिर्फ नारों में नहीं होना चाहिए,
हर नागरिक के कर्म में हिंदुस्तान होना चाहिए।
120.
मिट्टी की खुशबू जिसने पहचान ली,
उसने भारत की आत्मा जान ली।
121.
देश बदलने की बातें बहुत लोग करते हैं,
कुछ लोग चुपचाप अपना हिस्सा निभाते हैं।
122.
भारत की मिट्टी ने बहुत कुछ दिया है मुझे,
अब इस मिट्टी के लिए कुछ करने की बारी है।
123.
तिरंगा सिर्फ कपड़ा नहीं, भावनाओं की शान है,
इसके तीन रंगों में पूरा हिंदुस्तान है।
124.
सीमा पर जवान और खेत में किसान,
इन दोनों से चलता है मेरा हिंदुस्तान।
125.
जिस देश ने मुझे पहचान दी,
उस देश के लिए मेरी हर सांस सम्मान है।
126.
देशभक्ति आवाज से नहीं, आचरण से दिखती है,
भारत की ताकत उसके नागरिकों के चरित्र में दिखती है।
खंड 13 — युवा और प्रेरणा
127.
युवा वही जो सवाल करने से न डरे,
और जवाब मिलने पर जिम्मेदारी से भी न भागे।
128.
सपना बड़ा रखो मगर कदम जमीन पर रखो,
आसमान छूना है तो पहले जमीन समझो।
129.
असफलता से डरोगे तो शुरुआत कैसे होगी,
गिरोगे नहीं तो उड़ान की पहचान कैसे होगी?
130.
मोबाइल की स्क्रीन से बाहर भी दुनिया है,
अपने हुनर को समय दो, यही असली पूँजी है।
131.
डिग्री तुम्हें नौकरी दे सकती है,
कौशल तुम्हें पहचान दे सकता है।
132.
युवा शक्ति सिर्फ उम्र का नाम नहीं,
नई सोच और नई जिम्मेदारी का नाम है।
133.
आज का हुनर कल की ताकत बनेगा,
जो सीख रहा है वही आगे बढ़ेगा।
134.
दूसरों से मुकाबला करने में उम्र मत गंवाना,
हर दिन खुद से बेहतर बनने का लक्ष्य बनाना।
135.
जिस दिन सीखना बंद कर दिया,
उसी दिन बढ़ना भी बंद कर दिया।
खंड 14 — समय और अनुभव
136.
वक्त बड़ा अजीब शिक्षक है,
फीस भी लेता है और सबक भी देता है।
137.
उम्र बढ़ी तो आईना और साफ दिखाई दिया,
दुनिया से ज्यादा खुद को पहचान लिया।
138.
अब हर चमक को सोना नहीं समझता,
हर मुस्कान के पीछे की कहानी समझता हूँ।
139.
वक्त के साथ चेहरे बदलते देखे हैं,
इसलिए अब किरदार पढ़ना सीख गया हूँ।
140.
जिंदगी की किताब में हर अध्याय जरूरी है,
कुछ सुख देते हैं, कुछ समझ देते हैं।
141.
जो कल था, वह आज नहीं है,
जो आज है, वह कल नहीं होगा—यही जिंदगी है।
142.
समय को हल्के में मत लेना दोस्तों,
वक्त निकल जाए तो हाथ सिर्फ यादें आती हैं।
143.
अनुभव की कोई उम्र नहीं होती,
एक ठोकर कई किताबों से ज्यादा सिखाती है।
144.
अब जीत से ज्यादा सीखने की खुशी है,
क्योंकि समझ आ गया—यही असली जिंदगी है।
खंड 15 — हास्य और हल्की-फुल्की महफिल
145.
बीवी ने पूछा—इतना देर से क्यों आए?
मैंने कहा—देश की चिंता थी,
उन्होंने कहा—पहले घर की चिंता करो! 😄
146.
जेब में पैसा कम था, मगर अंदाज नवाबी था,
दोस्तों ने चाय पिलाई—मैंने कहा, आज मेजबानी हमारी थी! 😄
147.
डाइट पर था मैं सुबह से बड़े विश्वास के साथ,
शाम को समोसा आया और विश्वास चला गया। 😄
148.
उम्र पूछने वालों से अब रिश्ता कम रखता हूँ,
आईना रोज बता देता है, मैं किस दौर में हूँ। 😄
149.
हमने सोचा था जिंदगी में बहुत आराम करेंगे,
फिर जिम्मेदारियाँ मिलीं और सपने किराए पर चले गए। 😄
150.
महफिल में हमने शेर सुनाया बड़े अभिमान से,
दोस्त बोले—भाई, पहले चाय पिला, फिर ज्ञान दे आराम से! 😄
151.
मोबाइल ने सबको इतना व्यस्त कर दिया,
अब सामने बैठा दोस्त भी ऑनलाइन पूछता है—“कहाँ हो?” 😄
152.
पैसा आया तो खर्चे भी साथ चले आए,
लगता है दोनों की पुरानी दोस्ती है। 😄
खंड 16 — रिश्ते और बदलती दुनिया
153.
रिश्ते शब्दों से नहीं, समय देने से बनते हैं,
जो वक्त में साथ हों वही अपने कहलाते हैं।
154.
आजकल लोग हाल पूछते हैं ऑनलाइन,
मगर दर्द समझने के लिए ऑफलाइन होना पड़ता है।
155.
फासले शहरों के नहीं, दिलों के होते हैं,
कुछ लोग पास रहकर भी बहुत दूर होते हैं।
156.
रिश्तों को भी पौधों की तरह सींचना पड़ता है,
सिर्फ नाम लिख देने से पेड़ नहीं बनता।
157.
जो हर वक्त उपलब्ध रहे उसे हल्का मत समझना,
वही अक्सर सबसे ज्यादा अपना होता है।
158.
रिश्ता बचाना हो तो अहंकार थोड़ा कम करना पड़ता है,
हर बहस जीतना जरूरी नहीं होता।
159.
कुछ रिश्ते खून से बनते हैं,
कुछ विश्वास से—और कभी-कभी विश्वास ज्यादा गहरा होता है।
खंड 17 — अकेलापन और आत्मचिंतन
160.
कभी अकेले बैठकर खुद से भी बात किया करो,
दुनिया को समझने से पहले खुद को समझा करो।
161.
भीड़ में रहकर भी तन्हा होना देखा है,
और अकेले रहकर खुद को पाया है।
162.
हर सवाल का जवाब दुनिया से मत पूछो,
कुछ जवाब तुम्हारे भीतर भी रहते हैं।
163.
खामोशी हमेशा खालीपन नहीं होती,
कभी-कभी उसमें बहुत गहरी सोच होती है।
164.
मैं खुद से रोज एक सवाल करता हूँ,
क्या आज का राकेश कल वाले राकेश से बेहतर है?
165.
जिंदगी में सबसे कठिन मुलाकात खुद से होती है,
क्योंकि वहाँ कोई झूठ नहीं चलता।
खंड 18 — नेतृत्व और जिम्मेदारी
166.
नेता वह नहीं जो सबसे आगे दिखाई दे,
नेता वह है जो सबसे पीछे वाले को भी साथ ले चले।
167.
जिम्मेदारी मिली तो अधिकार याद नहीं आया,
सबसे पहले अपना कर्तव्य याद आया।
168.
कारवाँ बनाना है तो अकेले तेज चलना छोड़ो,
साथ चलने वालों की रफ्तार समझो।
169.
नेतृत्व कुर्सी से नहीं, विश्वास से मिलता है,
लोग आदेश से नहीं, चरित्र से जुड़ते हैं।
170.
जो गलती अपनी मान सके वही बड़ा है,
जो श्रेय दूसरों को दे सके वही नेता है।
171.
मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ, मगर किसी को पीछे छोड़कर नहीं,
मेरी सफलता में मेरे साथियों की भी जगह होगी।
खंड 19 — असहमति और विचार
172.
हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं,
सम्मान से असहमत होना भी संस्कार है।
173.
विचारों का विरोध करो, इंसान का नहीं,
बहस को युद्ध बनाने का कोई अर्थ नहीं।
174.
आलोचना से घबराकर रास्ता नहीं बदलता,
सही हो तो सुधारता हूँ, गलत हो तो नहीं झुकता।
175.
जो मेरी कमी बताए उसका शुक्रिया करता हूँ,
आईना हमेशा खूबसूरत तस्वीर नहीं दिखाता।
176.
सच बोलने का साहस रखो मगर शब्द संभालकर,
सच्चाई अगर दिल तोड़ दे तो तरीका बदलो।
खंड 20 — अंतिम 24: राकेश मिश्रा की पहचान
177.
नाम राकेश मिश्रा है, बस नाम याद मत रखना,
मेरी सोच याद रखना, मेरा काम याद रखना।
178.
मैंने अपनी पहचान किसी विरासत से नहीं माँगी,
जो बनाया है अपनी मेहनत से बनाया है।
179.
राकेश मिश्रा की कहानी अभी खत्म नहीं हुई,
कुछ पन्ने लिखे हैं, पूरी किताब अभी बाकी है।
180.
मैं जहाँ खड़ा हूँ, वहीं से शुरुआत करता हूँ,
रास्ता न मिले तो रास्ता तैयार करता हूँ।
181.
मेरे पास दौलत से ज्यादा अनुभव है,
और अनुभव से ज्यादा आगे बढ़ने का साहस है।
182.
मेरी सबसे बड़ी पूँजी मेरा विश्वास है,
और सबसे बड़ा निवेश मेरा समय है।
183.
मैंने जिंदगी से आराम नहीं, अनुभव माँगा है,
हर गिरावट में खुद को बेहतर पाया है।
184.
मैं कल से बेहतर आज बनना चाहता हूँ,
और आज से बेहतर कल बनाना चाहता हूँ।
185.
मेरा सपना सिर्फ मेरा घर रोशन करना नहीं,
जहाँ तक हो सके किसी और का घर भी रोशन करना है।
186.
मैं सफलता को अकेले नहीं देखता,
मेरे साथ कितने लोग उठे—यह भी देखता हूँ।
187.
मेरे लिए बड़ा आदमी होना जरूरी नहीं,
अच्छा इंसान बने रहना जरूरी है।
188.
समय बदलेगा, लोग बदलेंगे, रास्ते बदलेंगे,
मगर मेरे सिद्धांत नहीं बदलेंगे।
189.
मैंने जिंदगी को शिकायत से नहीं, स्वीकार से जिया है,
जो मिला उसे धन्यवाद, जो नहीं मिला उसे प्रयास दिया है।
190.
मुझे अपनी मंजिल का पता है,
बस अब कदमों को थोड़ा और मजबूत करना है।
191.
मैं किसी से आगे निकलने की दौड़ में नहीं,
मैं अपनी क्षमता की सीमा तोड़ने की दौड़ में हूँ।
192.
आज अगर पहचान छोटी है तो कोई बात नहीं,
कहानी लंबी है—अभी वक्त बाकी है।
193.
जो मेरे साथ चले, उनका शुक्रिया,
जो विरोध में रहे, उनसे भी बहुत कुछ सीखा।
194.
मेरी जीत सिर्फ मेरी नहीं होगी,
जिसने साथ दिया उसकी भी होगी।
195.
मेरी कलम रुकेगी नहीं, जब तक सवाल बाकी हैं,
मेरी आवाज थमेगी नहीं, जब तक कुछ काम बाकी हैं।
196.
मैंने जिंदगी से बस इतना वादा किया है,
जहाँ रहूँगा वहाँ कुछ अच्छा छोड़कर जाऊँगा।
197.
नाम मिट सकता है, तस्वीर धुंधली हो सकती है,
मगर अच्छे कर्मों की याद नहीं मिटती।
198.
मैं चला जाऊँगा एक दिन इस दुनिया से,
मगर कोशिश है कि मेरी सोच कहीं चलती रहे।
199.
राकेश मिश्रा सिर्फ एक नाम नहीं, एक सफर है,
जिसमें संघर्ष भी है, संवेदना भी और एक बेहतर कल का असर है।
200. — अंतिम शेर
नाम राकेश मिश्रा है, मगर बात सिर्फ नाम की नहीं,
दिल में हिंदुस्तान है और सोच इंसानियत की है।
मंजिल मिले न मिले, सफर बेकार नहीं जाएगा,
मैं चला जाऊँगा एक दिन—मगर मेरा काम रह जाएगा।
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