संदेश

नवंबर, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

No- 397 तेरे दर से रूठकर जाऊँ कहाँ... राकेश मिश्रा की कलम से

(मुखड़ा) तुझसे रूठूँ, तो जाऊँ कहाँ, तेरे सिवा है मेरा कहाँ? आँखों में दरिया, लब पे दुआ, तू ही बता, अब कहूँ क्या? तूने ही रुलाया, तू ही मना ले, टूटे हुए दिल को फिर से उठा ले। तेरे ही दर पे बिखरा पड़ा हूँ, चाहे सज़ा दे, चाहे लगा ले॥ (अंतरा – 1) जिनको मेरी दुआओं ने माँगा, क्यों उनको ही वक्त ने छीना? जिनके लिए खुद को भुलाया, क्यों उनसे ही दर्द है पाया? क्या मेरी चाहत में खता थी? क्या मेरी किस्मत ही सज़ा थी? तू सामने होकर भी चुप क्यों, क्या मेरी आवाज़ अनसुनी थी? (मुखड़ा) तुझसे रूठूँ, तो जाऊँ कहाँ, तेरे सिवा है मेरा कहाँ? आँखों में दरिया, लब पे दुआ, तू ही बता, अब कहूँ क्या? (अंतरा – 2) हँसी का मुखौटा पहने हुए, फिरता हूँ दर्द को सीने हुए। महफ़िल में सबको हँसाता हूँ, तन्हाई में खुद को रुलाता हूँ। तकिये ने रातों का हाल सुना, आँखों ने कितने सवाल बुने। जिस दर्द को दुनिया पढ़ न सकी, वो दर्द तेरे दर पर रख दिया। (अंतरा – 3) माथे की धूल तिलक हुई, आँसू की बूँद अभिषेक हुई। जिस 'मैं' को सीने से बाँधा था, वो तेरी चौखट पर राख हुई। अब जीत का कोई मान नहीं, अब ह...

No- 396. जब तक घर नहीं छोड़ोगे, तब तक कहीं नहीं पहुँचोगे!

अपनी सीमाओं से बाहर निकलने, संभावनाओं को पहचानने और स्वयं अपनी पहचान बनाने का जीवन-दर्शन मनुष्य का जीवन संभावनाओं से भरा होता है। हर व्यक्ति के भीतर कुछ बड़ा करने, अपनी अलग पहचान बनाने, परिवार का नाम रोशन करने और समाज में अपना योगदान देने की इच्छा होती है। कोई वैज्ञानिक बनना चाहता है, कोई उद्यमी, कोई खिलाड़ी, कोई लेखक, कोई कलाकार तो कोई देश और समाज के लिए कुछ असाधारण करना चाहता है। लेकिन एक सवाल है—क्या केवल सपने देखने से कोई व्यक्ति अपनी मंजिल तक पहुँच सकता है? क्या प्रतिभा, शिक्षा और संसाधन ही सफलता के लिए पर्याप्त हैं? यदि ऐसा होता तो दुनिया में हर प्रतिभाशाली व्यक्ति सफल होता और हर शिक्षित व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुरूप ऊँचाई प्राप्त कर चुका होता। वास्तविकता इससे अलग है। अक्सर हमारी सबसे बड़ी बाधा परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि वे सीमाएँ होती हैं जिन्हें हमने स्वयं अपने चारों ओर बना लिया है। हम बदलाव चाहते हैं, लेकिन अपनी आदतें बदलना नहीं चाहते। हम सफलता चाहते हैं, लेकिन असफलता का जोखिम नहीं उठाना चाहते। हम नई पहचान चाहते हैं, लेकिन पुराने परिचित दायरे से बाहर निकलने का साहस नहीं जुट...