“आख़िरी उड़ान ” .. ✍️ — Rakesh Mishra

धीरे-धीरे चलता बादल — आज ज़रा-सा ठहर जाता है,

तेज़स की वह अंतिम उड़ान, दिल की दीवारें चीर जाता है।

ऊँचे सपनों की राहों में, पंख जले — पर मन न डरा,
वीरों की किस्मत में मृत्यु नहीं… बस पड़ता है विराम ज़रा।

माँ जैसा विस्तृत आकाश — जिसमें उसका स्वप्न खिला,
हर धड़कन में तिरंगा था, हर पल भारत संग चला।

जब रनवे पर कदम बढ़ाया, सूरज भी झुककर ये बोला—
“ज़िंदगी भले छोटी हो, पर उड़ान तुम्हारी बहुत बड़ी होना…”

किसने सोचा था — आज की उड़ान इतिहास में दर्ज हो जाएगी,
हज़ारों आँखों के आगे मौन-सी दस्तक दे जाएगी।

धरती ने जब उसे छुआ, हवा सिसकी— दर्द भरी कहानी थी,
"वीर गया नभ की गोद में… पर यादें मेरी अभी भी अनजानी थीं।”

वीर पायलट कभी खोते नहीं — तारे बनकर जगते हैं वो,
रात-रात भर चाँद के कानों में अपनी यात्रा कहते हैं वो।

तेज़स टूट गया… पर उसमें जो अग्नि थी,
वह आज भी भारत के दिल में दीपक बनकर जलती है।

देश भले एक पल रो ले — पर गाथा रुकी नहीं,
वीरों की अंतिम उड़ानों से ही नींव मज़बूत बनती कहीं।

जब बच्चे पूछें — “कौन था वो?” हवा कहती बहुत धीमे—
“भारत माँ का साहस था वो, जिसके आगे स्वयं शौर्य भी नतमस्तक होते।”

आज उसी राह पर खड़े होकर — मन ही मन यह कहते हैं—
“सलाम तुम्हारी उड़ानों को… जो देह छोड़कर भी राष्ट्र की धड़कनों में जीवित रहते हैं।”

आज भी रात उतरती है — तो एक तारा सबसे तेज़ चमकता है,
लोग ठहरकर कहते…
“देखो, वो वही पायलट है…
जो आज भी आकाश में उड़ता है…”


🇮🇳 अंतिम श्रद्धांजलि

Wing Commander Namansh Syal और उनके परिवार को हमारी विनम्र, हृदय से निकली श्रद्धांजलि।
उनकी बहादुरी, समर्पण और राष्ट्र के लिए दिया गया योगदान – भारत हमेशा स्मरण रखेगा।

Dated-21/11/25




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