मानवता ही सच्चा धर्म
गौ की ममता का मान रखो, गाँवों की पहचान रखो,
गंगा की पावन धारा में भारत की शान रखो।
यह भूमि ऋषियों की तपोभूमि, यह त्याग-तपस्या का मर्म,
सुन लो जग के मानवों — मानवता ही सच्चा धर्म।
मंदिर की घंटी गूँजे तो मन भी पावन होना चाहिए,
केवल शब्दों से नहीं, जीवन से धर्म होना चाहिए।
कर्तव्य-पथ पर जो अडिग रहे, वही सच्चा वीर,
लोभ-मोह की ज्वाला बुझाकर बने युगों का धीर।
जब-जब मन में अहंकार का अंधकार छा जाता है,
मानव अपने ही हाथों से अपना घर जला जाता है।
जागो! भीतर दीप जलाओ, सत्य-अहिंसा धारण करो,
नैतिकता की ढाल उठाकर अन्यायों का हरण करो।
नशे की बेड़ी तोड़ो अब, चेतना को मुक्त करो,
अपने जीवन को उज्ज्वल कर भारत को भी युक्त करो।
सद्भावों की शीतल छाया हर हृदय में फैलाओ,
भाईचारे की पावन गंगा घर-घर तक ले जाओ।
अणुव्रत का यह दिव्य संदेश — छोटा-सा संकल्प उठाओ,
पहले खुद को जीत लो फिर जग को जीत दिखाओ।
चरित्र-निर्माण की नींव रखो, बनो समय की आवाज़,
सत्य, संयम, सेवा से लिख दो भारत का नया इतिहास।
गौ बचेगी तो करुणा बचेगी, गाँव बचेंगे तो देश बचेगा,
गंगा बहेगी निर्मल जब, तब ही भारत विशेष बचेगा।
मानवता का दीप जला दो हर अंतर के द्वार,
तभी स्वर्णिम युग आएगा, होगा जग उद्धार।
धर्म न केवल वाणी में हो, कर्मों में ज्वाला बन जाए,
हर मानव के अंतर्मन में एक नया उजाला छा जाए।
आओ मिलकर प्रण करें — यह राष्ट्र महान बने,
मानवता के पथ पर चलकर भारत फिर से विश्वगुरु बने!
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