राम–हनुमान की चेतना


हमको राम की भक्ति देना,
मन के भीतर दीप जला देना।
डर के अंधेरे दूर भगाकर,
साहस का सूरज उगा देना॥

राम काज में जीवन अर्पण,
सांस–सांस को सेवा बनाना।
हनुमत बल को मन में भरकर,
हर असंभव को संभव बनाना॥

हृदय में जब राम बस जाएँ,
तब राहें खुद सरल हो जातीं।
तूफानों की गर्जन भी फिर,
मन को तनिक न डिगा पाती॥

“प्रबिसि नगर कीजे सब काजा”—
यह मंत्र नहीं, यह संकल्प बने।
जिसने भीतर राम बसा लिए,
हर सपना साकार बने॥

जब तक अधूरा है राम काज,
कैसा आराम, कैसी नींद।
कर्तव्य की अग्नि जले जब,
थकान स्वयं हो जाती मंद॥

“राम काजु कीन्हें बिनु मोहि”—
हनुमत का यह उद्घोष महान।
जिस जीवन में लक्ष्य नहीं है,
वह जीवन है बस एक थकान॥

हे प्रभु! साहस, बुद्धि देना,
ज्ञान की ज्योति मन में भरना।
अज्ञान, आलस, भय के बादल,
एक झोंके में दूर ही करना॥

“बल बुद्धि विद्या देहु मोहि”—
यह प्रार्थना है योद्धा की।
पहले भीतर जीत सुनिश्चित,
तभी विजय है जगत की॥

जब राम नाम की ज्योति जले,
कट जाए भव का बंधन।
डर, संशय, सब पिघल जाएँ,
हो मन पावन, हो जीवन॥

“जासु नाम जपि भव भय टरै”—
यह अनुभव की साक्षी वाणी।
राम नाम केवल शब्द नहीं,
यह आत्मा की अमर कहानी॥

जो राम रचें, वही घटित हो,
यह विश्वास अडिग हो जाए।
व्यर्थ चिंता, व्यर्थ गणनाएँ,
मन से एक-एक मिट जाएँ॥

“होइहि सोइ जो राम रचि राखा”—
यह हार नहीं, यह शक्ति है।
कर्म करो, भय छोड़ो मन,
यही जीवन की युक्ति है॥

मैं हूँ राम दूत बजरंगी,
सीता माँ का सेवक हूँ।
सत्य, करुणा, धर्म-पथ पर,
हर क्षण अडिग, अडोल हूँ॥

“राम नाम ही श्वास बने अब”—
यही प्रतिज्ञा, यही प्रण।
देह रहे या न रहे देह,
राम रहे हर क्षण, हर क्षण॥

जय जय राम, जय जय हनुमान,
दीनों पर कृपा बरसाना।
मन–क्रम–वचन एक हो जाएँ,
ऐसा हमें समर्थ बनाना॥

राम नाम में जीवन बीते,
यही धर्म, यही पहचान।
भीतर जागे हनुमान हमारे,
और जग में हो कल्याण॥

जय श्रीराम 🚩
जय जाग्रत बजरंगबली 🙏

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