“बेटी की रुख़्सती — आँचल में दुआएँ, दिल में प्रकाश”
जिस आँगन में तू खिली थी चाँद की पहली किरण बनकर,
आज उसी आँगन से चल पड़ी है नई दिशा का दर्पण बनकर।
माँ की पलकें भीग गईं तेरे पायल की धीमी थर्राहट में,
पिता का दिल काँप उठा तेरे आँचल की अंतिम सरसराहट में।
जा बेटी… तेरी हर राह पर प्रभु का अपार आशीष खिले,
तेरे जीवन-सितारे हर क्षण नई रौशनी में मिलें।
पीहर की हर दीवार तेरी परछाईं से भर आई,
तेरे कदमों की धुन से पूरी दहलीज़ भी सिसकाई।
तूने बचपन की हँसी इन दरवाज़ों पर छोड़ दी,
हमने अपनी साँसें भी तेरे संग आज मोड़ दी।
जा बेटी… नए घर में तेरा मान, तेरा सम्मान सदा बढ़े,
जिस पल तू मुस्कुराए, हर दिल में फूलों की महक चढ़े।
तेरे जाने से घर का हर कोना सूना-सूना लगता है,
छत की हवा भी तेरे बिना जैसे बैठकर रोता है।
माँ के आँचल में जो गर्माहट थी,
वह अब तेरी यादों में बसेगी—एक अनकही राहत थी।
जा बेटी… तेरा ससुराल तुझे उस प्यार से सजाए,
कि तेरे मन में कभी कोई ग़म पास भी न आए।
पिता के कदम थम गए पर दुआएँ तेज़ बह चलीं,
चेहरे पर मुस्कान पर आँखों में बाढ़-सी आ चली।
हजार सपने हमने तेरी हथेलियों पर रख दिए,
नए आँगन में खिलने को सब सौंप तुझे विदा कर दिए।
जा बेटी… तेरी किस्मत में बस उजियारा ही उजियारा हो,
तेरी हर सुबह मधुर, हर शाम सितारों से प्यारा हो।
जब भी याद आए यह आँगन, दुआ समझकर मुस्कुराना,
माँ-बाप का प्यार है तेरे संग—कभी न टूटने वाला अफसाना।
नए रिश्तों का मान बढ़ाना, सबको दिल से अपनाना,
और उजालों से भरा अपना हर कल सजाना।
जा बेटी… तेरी पायल की हर झंकार में प्रभु का वरदान मिले,
जहाँ भी तू रहे, वहाँ तेरे दिल को अपार सम्मान मिले।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें