“हे महाबीर, मुझे आप में मिला दीजिए”


🙏 प्रार्थना–भजन
“हे महाबीर, मुझे आप में मिला दीजिए”
(हनुमान चालीसा की सिद्ध चौपाइयों सहित)
स्थायी

 (मुखड़ा)

हे महाबीर, मुझे आप में मिला दीजिए,
मैं मैं न रहूँ, बस आप ही बना दीजिए।
मेरे बल–बुद्धि–अभिमान सब चरणों में धर,
दास बनाकर प्रभु, सेवा में रमा दीजिए॥

अंतरा 1 (संघर्ष और बल)

जन्म साधारण पाया, राहें कठिन रहीं,
हर मोड़ पे परीक्षा, हर जीत ऋण रही।
गिरकर भी जो उठा, तेरे नाम से उठा,
मेरी हर साँस में प्रभु, तेरा ही गुण गुंथा॥

🔸 सिद्ध चौपाई (पाठ)
“बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं,
हरहु कलेस विकार॥”
हे महाबीर, मुझे आप में मिला दीजिए…

अंतरा 2 (वाणी, लेखन और सेवा)

धन न दिया जग ने, वाणी तूने दी,
शब्दों में सत्य रख, पहचान तूने दी।
कलम हो या वचन, सब तेरी आज्ञा से,
जो भी लिखा–कहा, सेवा तेरे नाम से॥
🔸 सिद्ध चौपाई (पाठ)
“विद्यावान गुनी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर॥”
हे महाबीर, मुझे आप में मिला दीजिए…

अंतरा 3 (पीड़ा, परिवार और धैर्य)

पीड़ा आई जीवन में, धैर्य तूने दिया,
पिता का साया छूटा, संबल तूने दिया।
माँ की कृपा, बच्चों की मुस्कान साथ रही,
तेरी ही छाया में मेरी नैया पार रही॥
🔸 सिद्ध चौपाई (पाठ)
“संकट कटै मिटै सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥”
हे महाबीर, मुझे आप में मिला दीजिए…

अंतरा 4 (भय, रोग और बाधा नाश)

शोर से जब मन थका, मौन तूने सिखाया,
दौड़ से जब टूटा मैं, ठहरना समझाया।
भय भी आया, रोग भी, संशय भी घिरे,
तेरे नाम के आगे सब बंधन बिखरे॥
🔸 सिद्ध चौपाई (पाठ)
“नासै रोग हरै सब पीरा,
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥”
हे महाबीर, मुझे आप में मिला दीजिए…

अंतरा 5 (पूर्ण समर्पण – आप में विलय)

न नाम की चाह रखूँ, न मान का भार,
राम–दूत के चरणों में बस मेरा संसार।
जैसे हनुमत राम में रहे पूर्ण लीन,
वैसे मुझे भी कर दो आप में विलीन॥
🔸 सिद्ध चौपाई (पाठ)
“राम दुआरे तुम रखवारे,
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥”
हे महाबीर, मुझे आप में मिला दीजिए…

समापन (दोहा – प्रार्थना)

मैं मैं मिटे, तू तू हो जाए,
यही मेरी अरदास।
दास बने रहूँ जीवन भर,
हे बजरंग, मेरे श्वास॥

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