“जन्मदिवस नहीं… मेरा संकल्प-दिवस है”
आज नहीं होगा शोर-शराबा,
न ही केक, न कोई तमाशा।
आज आत्मा से उठी पुकार—
संकल्प बनूँ, यही है आशा।
मोमबत्ती की लौ तो बुझ जाएगी,
फूलों की खुशबू भी खो जाएगी;
पर एक संकल्प जो दिल में जगे—
वह जीवनभर राह दिखाएगी।
जन्मदिवस मेरा त्योहार नहीं,
ये लक्ष्य-प्रज्वलन की घड़ी है।
कल से बेहतर आज बनूँ—
यही मेरे भीतर पड़ी कड़ी है।
लक्ष्य नया, हौसला नया,
राह नई, पहचान नई;
हर वर्ष मैं खुद से कहता हूँ—
"मंज़िल होगी अब आसान नहीं!"
तोहफा मुझको चाहिए क्या?
बस निश्चय की अग्नि प्रबल।
उड़ान भरे हर एक कदम—
और हो हर कर्म में श्रद्धा अचल।
मेरा जन्म नहीं, मेरा संकल्प—
आज जगाता उजियारा है;
खुद से ऊपर उठने का
अंदर जागा इशारा है।
हर वर्ष ये प्रण मैं दोहराऊँ—
कदम न रुकें, न थकें कभी;
सत्य, श्रम, सेवा, सद्भाव—
रहें मेरे भीतर सदा सभी।
हाँ, मेरा जन्मदिवस नहीं—
मेरा संकल्प-दिवस है आज;
जीवन की राह सँवारने को
लाया है यह नई आवाज़।
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