“राखी का मोल”



राखी का मोल अगर पूछो,
तो भाई क्या उत्तर देगा?
धागा छोटा–सा है लेकिन
इसमें जीवन तक दे देगा।
बहन की खातिर तो भाई
हर आँधी से टकरा जाएगा,
राखी की डोर बंधी हो जब—
वो खुद से पहले बहन को बचाएगा।


ये धागा सिर्फ धागा नहीं,
माँ की ममता का साया है,
नन्ही हथेलियों में बहना
जब बचपन से इसे लाया है।
इसमें छुपे वो पल—
जब बहन रोई और भाई सम्भाला,
जब भाई गिरा तो बहन ने भी
अपना डर पीछे डाला।


राखी का मोल दुकानों में
कभी बिकता ही कहाँ है,
इसमें तो बहन का विश्वास
और भाई का प्रण समाया है।
जो हाथ रखता बहन के सिर पर,
वही हाथ कभी काँपे नहीं,
बहन की आँखों में आँसू हों
तो भाई की रातें सोए नहीं।


राखी का मोल न आँका जाए—
ये रूह का रिश्ता होता है,
जीवन चाहे लाख परीक्षाएँ दे
पर साथ हमेशा होता है।
कभी दूरियाँ आएँ जग में
तो ये धागा याद दिलाता है—
“बहना! तू मुस्कुरा…
तेरा भाई हमेशा तेरे साथ खड़ा नज़र आता है।”


राखी का मोल है वचन—
कि बहन पर आँच न आने पाए,
राखी का मोल है विश्वास—
कि भाई का प्यार न घटने पाए।
राखी का मोल है आशीष—
कि बहन जहाँ भी जाए चमके,
राखी का मोल है समर्पण—
कि भाई जीवन तक उसके दुख हर ले।


💛 अंतिम भाव

राखी का मोल धागे में नहीं,
बहन की मुस्कान में है…
और भाई के दिल में जो वचन है—
वही इसकी असली जान है।



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