उन्नायक की उड़ान


ज़िंदगी की राहों में हर कोई उड़ना चाहता है,
पर उड़ान सिर्फ़ पंखों से नहीं, विश्वास से होती है।

उन्नायक वह होता है –
जो दूसरों को उठाकर आगे ले चले,
जो रोशनी खुद न बने,
पर लोगों के लिए दीपक जला दे।

जब वो चलता है,
तो रास्ते में आने वाले काँटे भी
मकसद के आगे छोटे लगते हैं।
वो जानता है —
ऊँचाइयाँ मंज़िल नहीं,
मक़सद है औरों को ऊपर उठाना।

उसकी उड़ान में घमंड नहीं,
जिम्मेदारी और सेवा का एहसास होता है।

जो हाथ पकड़कर चलाए,
जो गिरने पर उठाए,
जो सपनों को सिर्फ बोले नहीं,
जीने का रास्ता दिखाए —
वही है उन्नायक।

और याद रखिए —
उड़ान तभी सच्ची होती है,
जब हमारे साथ कोई और भी उड़ रहा हो। ✨

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Consistency Se Zero Se Banta Hai Hero

आज के दौर में मानवता की प्रासंगिकता

🇮🇳 "भारत अपनी बेटियों पर गर्व करता है" 🇮🇳 ✍️With Respect & Pride— Rakesh Mishra