वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिक. (India’s Role in the Global Context) , Rakesh Mishra Reacharch Notes



मजबूत और उत्तरदायी ढांचा बनाने की जरूरत — आज के वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका


भूमिका : विश्व व्यवस्था में नए युग की पुकार

आज का विश्व एक गहरे परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
जहाँ एक ओर भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक असमानता, जलवायु संकट और वैश्विक आतंकवाद जैसी चुनौतियाँ हैं,
वहीं दूसरी ओर नवप्रवर्तन, तकनीकी विकास, और मानवीय एकता की नई संभावनाएँ भी जन्म ले रही हैं।

ऐसे समय में, जब संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका कई प्रश्नों के घेरे में है और वैश्विक नैतिकता का संतुलन डगमगा रहा है,
भारत एक संवेदनशील, संतुलित और उत्तरदायी शक्ति के रूप में उभर रहा है —
जो “शक्ति” और “संस्कार” दोनों का प्रतीक है।


1️⃣ वैश्विक परिवर्तन और संस्थागत संकट

आज अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ जैसे संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), IMF, WTO आदि
तेजी से बदलती दुनिया के अनुरूप अपने आप को ढाल नहीं पा रही हैं।
बहुपक्षीय निर्णय प्रणाली (Multilateralism) कमज़ोर हो रही है और शक्तिशाली राष्ट्र अपने हितों के अनुसार
वैश्विक नीतियों को मोड़ रहे हैं।

ऐसे में ज़रूरत है एक मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम और उत्तरदायी ढांचे की,
जो केवल शक्ति संतुलन पर नहीं, बल्कि मानवता, न्याय और समावेशिता पर आधारित हो।


2️⃣ भारत की भूमिका – नैतिक शक्ति और तकनीकी क्षमता का संगम

भारत ने सदैव “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना को विश्व के सामने रखा है —
जिसका अर्थ है, “पूरा विश्व एक परिवार है।”
आज यही दर्शन एक मानवीय और स्थायी विश्व व्यवस्था के निर्माण का आधार बन सकता है।

भारत की भूमिका अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति की नहीं,
बल्कि एक वैश्विक मध्यस्थ (Global Mediator), शांति दूत (Peace Contributor) और तकनीकी साझेदार (Tech Collaborator) के रूप में उभर रही है।

🔹 प्रमुख बिंदु :

  • भारत संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक मिशनों (UN Peacekeeping Missions) में शीर्ष योगदानकर्ताओं में है।
  • भारत ने G20 Summit 2023 में “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” का संदेश दिया।
  • भारत की Digital Public Infrastructure (DPI) प्रणाली — जैसे Aadhaar, UPI, CoWIN
    अब वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत हो रही है।
  • भारत कूटनीति, रक्षा और विकास के त्रिकोणीय संतुलन पर काम कर रहा है।

3️⃣ तकनीकी एकीकरण और सैन्य आधुनिकीकरण

वैश्विक सुरक्षा वातावरण अब पारंपरिक युद्धों से आगे बढ़ चुका है।
अब Cyber Warfare, Artificial Intelligence, Drone Operations, और Data Security जैसे क्षेत्र
रक्षा की नई सीमाएँ तय कर रहे हैं।

भारत को अपनी सेना को इन नई आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना होगा —
जहाँ स्वदेशी तकनीक (Indigenous Technology), AI-सक्षम कमांड सिस्टम, और
त्वरित तैनाती क्षमता (Rapid Deployment Capability) पर विशेष ध्यान दिया जाए।

भारत का “Make in India – Defence” अभियान इसी दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
यह न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक रक्षा सहयोग में भी भारत की भागीदारी को सशक्त बना रहा है।


4️⃣ बहुपक्षीय सहयोग और सामूहिक उत्तरदायित्व

विश्व के सामने आज जो सबसे बड़ी चुनौती है, वह है — विश्वास की कमी (Trust Deficit)
यही कारण है कि आतंकवाद, पर्यावरण संकट और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर वैश्विक एकजुटता कमजोर है।

भारत इस दिशा में बहुपक्षीय सहयोग (Multilateral Cooperation) का प्रवक्ता है।
चाहे BRICS, SCO, QUAD, या G20 हो — भारत हर मंच पर
संवाद, सम्मान और संतुलन की नीति अपनाता है।

भारत का दृष्टिकोण यह है कि —
“शक्ति का उपयोग वर्चस्व के लिए नहीं, संरक्षण के लिए होना चाहिए।”


5️⃣ संयुक्त राष्ट्र सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता की आवश्यकता

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का ढांचा आज भी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की
भू-राजनीति को दर्शाता है।
वर्तमान विश्व परिदृश्य में भारत, जो विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति है,
और 18% मानवता का प्रतिनिधित्व करता है, उसे स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।

भारत की उपस्थिति वैश्विक संतुलन, विकासशील देशों की आवाज़, और मानवीय कूटनीति को मजबूत करेगी।
संयुक्त राष्ट्र को यदि अपनी नैतिकता और प्रासंगिकता बनाए रखनी है,
तो उसे भारत जैसे देशों को बराबर की भूमिका देनी होगी।


6️⃣ वैश्विक चुनौतियाँ – जहाँ भारत कर रहा है नेतृत्व

क्षेत्र भारत की पहल
पर्यावरण एवं जलवायु International Solar Alliance, Mission LiFE
स्वास्थ्य CoWIN प्लेटफ़ॉर्म, वैक्सीन कूटनीति (Vaccine Maitri)
आर्थिक समावेशन डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्टार्टअप इंडिया
शांति एवं सुरक्षा UN Peacekeeping, रक्षा कूटनीति
सांस्कृतिक सहयोग योग, आयुर्वेद, हिंदी और संस्कृत का प्रसार

भारत का यह बहुआयामी दृष्टिकोण उसे वैश्विक संतुलनकारी शक्ति (Balancing Power) बनाता है।


7️⃣ नैतिक और मानवीय आधार पर विश्व नेतृत्व

भारत का वास्तविक सामर्थ्य उसकी नैतिकता, संस्कृति और मूल्य-प्रधान दृष्टिकोण में है।
जहाँ अन्य राष्ट्र केवल शक्ति की भाषा बोलते हैं,
भारत संस्कार और संवाद की भाषा बोलता है।

इसलिए, भारत का नेतृत्व केवल राजनीतिक या सैन्य दृष्टि से नहीं,
बल्कि मानवीय चेतना के स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।


निष्कर्ष : एक नए युग के लिए नया ढांचा

आज मानवता को ऐसे ढांचे की आवश्यकता है जो
केवल “मजबूत” ही नहीं, बल्कि “उत्तरदायी” भी हो।

भारत इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकता है —
क्योंकि उसके पास है तकनीकी कौशल, मानवीय दृष्टिकोण, और सांस्कृतिक संतुलन की शक्ति।

संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को
भारत के अनुभव और दर्शन से सीख लेनी चाहिए —
क्योंकि “जब शक्ति के साथ संस्कार जुड़ जाता है,
तभी विश्व में स्थायी शांति और विकास संभव होता है।”


संक्षिप्त संदेश :

“भारत की शक्ति केवल उसकी सेना या अर्थव्यवस्था में नहीं,
बल्कि उसकी आत्मा में है — जो विश्व को ‘एक परिवार’ के रूप में देखती है।” 🇮🇳



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