पंकज मिश्रा : अभावों से अवसर तक की अनोखी यात्रा. एक प्रेरणादायक लेख
— संघर्ष, साहस और सही प्रक्रिया से सफलता रचने की कहानी
कहते हैं, सपनों की उड़ान का कोई संबंध पंखों से नहीं होता, बल्कि हौसलों से होता है।
हकीकत में यह बात तब और भी गहरी हो जाती है जब कोई जीवन को अभावों और सीमाओं से शुरू करके स्वयं के लिए एक नई पहचान गढ़ ले।
पंकज मिश्रा की कहानी इसी भावना की मूर्त मिसाल है।
यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता का किस्सा नहीं है,
बल्कि हर उस युवा के भीतर आग जगाने वाला सच है,
जो सपने देखने की हिम्मत रखता है, लेकिन परिस्थितियाँ उसे रोकने की कोशिश करती हैं।
गोरखपुर से दिल्ली : संघर्ष की पहली सीढ़ी
साल 1995 में पंकज अपने परिवार के साथ गोरखपुर से दिल्ली आए।
न तो कोई स्थायी मकान, न पैसों की सुरक्षा, न कोई विशेष सुविधा—
रहने की जगह थी निर्माणाधीन इमारत का एक छोटा कमरा।
वहीं धूल, सीलन और सीमित साधनों के बीच पंकज का बचपन बीता।
उन्होंने पहली बार चॉकलेट पाँचवीं कक्षा में खाई।
जीवन में जो भी था, बहुत कम था,
पर इच्छाएँ, हौसले और सपने बहुत बड़े थे।
स्कूल में वह अक्सर पीछे बैठते, और यही पीछे बैठना —
धीरे-धीरे उनके भीतर पीछे रह जाने की पीड़ा बन गया।
लेकिन यही पीड़ा आगे चलकर प्रेरणा बन गई।
इंजीनियरिंग कॉलेज में असफलता और जीवन बदलने वाली सलाह
पंकज को इंजीनियरिंग कॉलेज केआईईटी (KIET) में प्रवेश मिला।
पर पहला साल असफलता के साथ गुज़रा।
किसी भी सामान्य युवक के लिए यह मोड़ टूटने का बिंदु हो सकता था।
लेकिन पंकज ने हार नहीं मानी।
उन्होंने अपनी माँ से बात की।
माँ ने कहा:
“बेटा, मेहनत तो सब करते हैं, पर मेहनत की दिशा और तरीका सही होना चाहिए। प्रक्रिया ठीक कर ले, नतीजे खुद सुधर जाएंगे।”
यह सलाह उनके जीवन की सबसे बड़ी सीख बन गई।
उन्होंने:
- पीछे की बेंच छोड़कर आगे की बेंच पर बैठना शुरू किया
- पढ़ाई को समझने और दोहराने की आदत विकसित की
- अपने समय को अनुशासनबद्ध किया
और परिणाम?
धीरे-धीरे सुधार होते हुए उन्होंने M.Tech में गोल्ड मेडल हासिल किया।
यह साबित करता है —
सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि सही प्रक्रिया से मिलती है।
कॉर्पोरेट दुनिया से उद्यमिता तक
गोल्ड मेडल के बाद पंकज ने Lava International और Delhivery जैसी कंपनियों में काम किया।
यह नौकरी उनके लिए सिस्टम, बाजार और संचालन को समझने की प्रयोगशाला साबित हुई।
लेकिन पंकज सिर्फ सिस्टम का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे,
वह अपना सिस्टम बनाना चाहते थे।
2019 में उन्होंने अपने पिता और पत्नी की मदद से
PND Global Logistics की सह-स्थापना की।
पहला साल: ₹51 लाख का टर्नओवर
कुछ ही वर्षों में: ₹35 करोड़+ का टर्नओवर
और शाखाएँ देश-विदेश तक फैल गईं।
यह यात्रा बताती है कि:
जहाँ इरादा मजबूत हो, वहाँ शुरुआत चाहे कितनी छोटी क्यों न हो — मंज़िल बड़ी होती है।
बेकईट्स (Bakeats) — सपनों का स्वाद
पंकज की सफलता यहीं नहीं रुकी।
उन्होंने FMCG सेक्टर में कदम रखा — वह क्षेत्र जो सीधे दिल और घर तक पहुंचता है।
दिसंबर 2024 में Bakeats की शुरुआत हुई।
लक्ष्य स्पष्ट था:
प्रीमियम स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता आम लोगों तक पहुँचाना।
इस ब्रांड की विशेषता है:
- ₹10 के पैक में भी प्रीमियम पैकेजिंग
- स्वाद और गुणवत्ता की गारंटी
- आने वाले समय में रागी, ज्वार और शुगर-फ्री हेल्दी स्नैक्स
उन्होंने मार्गदर्शन लिया FMCG क्षेत्र के दिग्गज
डॉ. गिरीश गुप्ता से, जिन्हें ‘FMCG जगत के भीष्म पितामह’ कहा जाता है।
और अब लक्ष्य है: ➡️ अगले 3 वर्षों में ₹400 करोड़ का राजस्व
प्रेरणा और सीख
पंकज की कहानी हमें यह नहीं सिखाती कि अभावों में जीना कठिन है।
यह कहानी सिखाती है कि:
| सत्य | सीख |
|---|---|
| संसाधन सीमित थे | लेकिन सपने सीमित नहीं थे |
| शुरुआत छोटी थी | लेकिन सोच विशाल थी |
| असफलता आई | लेकिन हार नहीं मानी गई |
| रास्ते कठिन थे | लेकिन कदम डगमगाए नहीं |
सपना बड़ा हो तो मंज़िल देर से ही सही, पर निश्चित मिलती है।
समापन : यह कहानी आपका आईना है
हर वह युवा जो कहता है कि मेरे पास साधन नहीं हैं,
हर वह व्यक्ति जो कहता है मेरा समय ठीक नहीं,
हर वह छात्र जो कहता है मैं पीछे रह गया हूँ —
उनके लिए यह कहानी है:
आपकी शुरुआत जहाँ से हुई है,
आपका अंत वहीं होना ज़रूरी नहीं।
आप जो हैं, वह आपकी परिस्थितियों का परिणाम है।
लेकिन आप क्या बनेंगे, यह आपके निर्णय का परिणाम होगा।
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