हार नहीं मानने वालों की पहचान – आदित्य विक्रम अग्रवाल की संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी
कभी–कभी जीवन हमें दो रास्तों के मोड़ पर खड़ा कर देता है — एक रास्ता आराम, सुविधा और सुरक्षित भविष्य की ओर जाता है, जबकि दूसरा रास्ता कठिनाइयों, चुनौतियों और अनिश्चितताओं से भरा होता है। पहला रास्ता आसान होता है, लेकिन दूसरा वही रास्ता होता है जो इतिहास रचने वालों की मंज़िल तक पहुँचता है।
बहादुरगढ़, हरियाणा के रहने वाले आदित्य विक्रम अग्रवाल ने भी ऐसा ही रास्ता चुना। एक ऐसा रास्ता जो काँटों से भरा था, लेकिन उनकी मंज़िल IAS बनने की थी, भारत के सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनने की।
शिक्षा से शुरू हुआ अनुशासन का सफर
आदित्य बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे।
2012 में CBSE बोर्ड से 10वीं क्लास में 9.8 CGPA लाना कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी।
2014 में 12वीं में उन्होंने PCM में 96.8% अंक हासिल किए और झज्जर जिले के टॉपर बने।
उनके अंदर पढ़ाई को सिर्फ नंबरों तक सीमित करने का दृष्टिकोण नहीं था।
वे सीखने को जीवन सुधारने का माध्यम मानते थे।
इसके बाद उन्होंने NIT प्रयागराज ( MNNIT ) में एडमिशन लिया — जो देश की बेहतरीन इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक है। यहाँ भी उन्होंने अनुशासन, लक्ष्य और मेहनत का रास्ता जारी रखा।
कॉर्पोरेट जीवन और अच्छी सैलरी, फिर भी मन खाली…
ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद आदित्य को टाटा मोटर्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी मिल गई।
जहाँ सैलरी अच्छी थी, सुविधाएँ थीं, पहचान थी।
पर एक चीज़ की कमी थी — सपना।
मन के भीतर से एक आवाज़ बार–बार उठती —
"तुम्हें कुछ बड़ा करना है, सिर्फ अपने लिए नहीं, समाज के लिए भी।"
यह आवाज़ उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ बन गई।
एक दिन उन्होंने निर्णय लिया —
“यदि जीवन में कुछ महान करना है, तो सुविधा नहीं, संघर्ष चुनना होगा।”
और उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
UPSC – इच्छाशक्ति, परीक्षा और आत्मविश्वास की सबसे बड़ी कसौटी
UPSC दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है।
यह सिर्फ किताबों की परीक्षा नहीं लेती,
यह आपके इच्छाशक्ति, धैर्य, अनुशासन और मनोबल की भी परीक्षा लेती है।
आदित्य ने तैयारी शुरू की।
सुबह से रात तक पढ़ना, नोट्स बनाना, मॉक टेस्ट देना, गलतियों से सीखना —
सब कुछ ईमानदारी से किया।
लेकिन पहली बार रिजल्ट आया – असफल।
वे चुप रहे।
दूसरी बार – फिर असफल।
वे मुस्कुराए और वापस पढ़ाई में लग गए।
तीसरी बार – फिर असफल।
इस बार मन टूटा… लेकिन रुका नहीं।
चौथी बार – फिर असफल।
कोई और होता तो शायद यहीं हार मान लेता।
लेकिन आदित्य ने कहा —
“असफलता मेरी पहचान नहीं है, यह तो मेरे सफर का हिस्सा है।”
परिवार – वो नींव, जो हमें गिरने नहीं देती
जब मन से हिम्मत टूटने लगती है,
तब परिवार का विश्वास सबसे बड़ा सहारा बनता है।
आदित्य ने कहा –
“कई बार मैं निराश हुआ। लगा कि शायद मैं नहीं कर पाऊंगा।
लेकिन मेरे माता–पिता, बहन और मित्रों ने मेरा हाथ पकड़ा।
उन्होंने कहा — हम तुम्हारे साथ हैं।
उनका यह विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत था।”
पाँचवीं कोशिश — जीत, धैर्य, आत्मविश्वास और भारत की सेवा का आह्वान
पाँचवीं बार उन्होंने खुद को सिर्फ UPSC के लिए नहीं,
बल्कि अपने सपने और समाज के लिए तैयार किया।
इस बार न मन में डर था, न परिणाम की चिंता।
बस एक शांति —
“मैं कर सकता हूँ और करूँगा।”
जब रिज़ल्ट आया —
आदित्य विक्रम अग्रवाल ने AIR 9 प्राप्त किया।
यह सिर्फ एक रैंक नहीं थी।
यह था —
- सपनों का सम्मान
- संघर्ष की जीत
- परिवार के विश्वास की शक्ति
- और भारत की सेवा का अवसर
उनका UPSC स्कोर
| परीक्षा | अंक |
|---|---|
| लिखित (Mains) | 854 |
| इंटरव्यू | 173 |
| कुल | 1027 |
यह स्कोर साबित करता है कि लगन का परिणाम एक दिन चमक कर सामने आता ही है।
सफर से सीख — जो हर छात्र के लिए है
- सपने बड़े रखो — क्योंकि छोटे सपने आत्मा को नहीं झकझोरते।
- संघर्ष से डरो मत — क्योंकि संघर्ष ही आपकी पहचान बनाता है।
- असफलताओं से सीखो — वे आपको तोड़ने नहीं, गढ़ने आती हैं।
- अनुशासन सबसे बड़ा हथियार है — बिना अनुशासन लक्ष्य नहीं मिलता।
- परिवार का सम्मान करो — क्योंकि वही आपकी शक्ति की जड़ है।
समापन – एक संदेश
आदित्य की कहानी हमें सिखाती है —
जीत केवल उन्हें मिलती है, जो हार मानने से इनकार कर देते हैं।
सपने पूरे होते हैं, बस हिम्मत और धैर्य का साथ मत छोड़ो।
अगर आपके अंदर भी कोई सपना पल रहा है —
तो उसे जगाओ, उसे पोषित करो,
और एक दिन दुनिया कहेगी —
“ये वही है जिसने हार नहीं मानी और जीत हासिल की।”
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