आत्मनिर्भरता – MSME का उत्थान, देश की सुरक्षा में योगदान और युवाओं के लिए वरदान
आज का भारत अपने स्वप्न – “आत्मनिर्भर भारत” – को साकार करने की दिशा में अग्रसर है। आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करना नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता, व्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक है, जहाँ एक राष्ट्र अपने संसाधनों, कौशल और नवाचार की शक्ति के बल पर स्वयं को सशक्त करता है।
भारत के लिए यह दृष्टिकोण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहाँ विशाल युवा जनसंख्या, प्राकृतिक संसाधन, तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक विरासत मौजूद है। इस अभियान के केंद्र में है – MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) क्षेत्र, जो देश की आर्थिक धुरी है।
MSME न केवल रोजगार उपलब्ध कराते हैं, बल्कि निर्यात, उत्पादन, नवाचार, ग्रामीण विकास और रक्षा क्षेत्र में भी देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दे रहे हैं। इन्हीं कारणों से MSME को “भारत की रीढ़” कहा जाता है।
1. आत्मनिर्भरता की परिभाषा और ऐतिहासिक दृष्टिकोण
आत्मनिर्भरता का अर्थ
- आत्मनिर्भरता का मूल अर्थ है – “अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति अपने संसाधनों और कौशल से करना।”
- इसका तात्पर्य यह भी है कि राष्ट्र इतना सक्षम बने कि संकट की घड़ी में वह दूसरों पर निर्भर न रहे।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
- महात्मा गांधी ने स्वदेशी आंदोलन के माध्यम से यह संदेश दिया कि जब तक हम विदेशी वस्तुओं पर निर्भर रहेंगे, हमारी स्वतंत्रता अधूरी रहेगी।
- स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा हथियार था – “खादी और चरखा” – जिसने आत्मनिर्भरता का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया।
- पं. नेहरू और डॉ. अम्बेडकर ने भी स्वदेशी औद्योगिकरण को देश की मजबूती का आधार माना।
👉 इस प्रकार, आत्मनिर्भरता कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और स्वभाव में रची-बसी है।
2. आत्मनिर्भरता का महत्व
आज के वैश्वीकृत दौर में आत्मनिर्भरता के अनेक आयाम हैं:
- आर्थिक स्वतंत्रता – स्थानीय उत्पादन से मुद्रा देश में रहती है।
- सामरिक सुरक्षा – रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता से विदेशी निर्भरता घटती है।
- संकट प्रबंधन – महामारी, युद्ध या प्राकृतिक आपदा में देश खुद को संभाल सकता है।
- रोजगार और सामाजिक विकास – स्वदेशी उद्योगों से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होता है।
- राष्ट्रीय गौरव – जब जनता अपने देशी उत्पादों का उपयोग करती है, तो आत्मविश्वास और गर्व बढ़ता है।
👉 महात्मा गांधी का कथन – “स्वदेशी आत्मनिर्भरता की आत्मा है।” – आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
3. भारत में MSME का महत्व और योगदान
आँकड़ों के आधार पर
- भारत की GDP में लगभग 30% योगदान MSME से है।
- भारत के कुल निर्यात में 45% हिस्सा MSME उत्पादों का है।
- लगभग 11 करोड़ लोग MSME में कार्यरत हैं।
- 6.5 करोड़ से अधिक MSME इकाइयाँ भारत के विभिन्न हिस्सों में कार्य कर रही हैं।
सामाजिक योगदान
- MSME ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विकास की धुरी हैं।
- यह महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
- “स्थानीय से वैश्विक” (Local to Global) की अवधारणा को MSME ही वास्तविकता प्रदान करते हैं।
👉 स्पष्ट है कि MSME केवल आर्थिक क्षेत्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का आधार भी है।
4. MSME और आत्मनिर्भर भारत अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान का केंद्र MSME क्षेत्र है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- क्रेडिट गारंटी योजना – MSME को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराना।
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) – युवाओं को उद्योग शुरू करने हेतु सहयोग।
- स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया – नवाचार और विनिर्माण को प्रोत्साहन।
- डिजिटल इंडिया – MSME को ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ना।
- Vocal for Local – स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान देना।
👉 इस प्रकार, MSME आत्मनिर्भर भारत अभियान की आधारशिला हैं।
5. MSME का देश की सुरक्षा में योगदान
आज सुरक्षा का अर्थ केवल सीमाओं की रक्षा नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी स्वावलंबन और रक्षा उत्पादन से भी है। MSME इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में MSME की भूमिका
- ड्रोन, AI आधारित निगरानी प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बुलेटप्रूफ जैकेट, वर्दी आदि का निर्माण।
- रक्षा मंत्रालय की योजनाएँ – Make-II और iDEX (Innovation for Defence Excellence) – MSME और स्टार्टअप्स को रक्षा तकनीक से जोड़ रही हैं।
- इससे विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम हो रही है और आयात बिल घट रहा है।
उदाहरण
- भारत के कई स्टार्टअप्स अब ड्रोन और साइबर सुरक्षा टूल्स बना रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर MSME के लिए अवसर लेकर आए हैं।
👉 आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन न केवल सुरक्षा बढ़ाता है, बल्कि भारत को वैश्विक हथियार निर्यातक बनाने की दिशा में भी ले जा रहा है।
6. MSME – युवाओं के लिए वरदान
भारत की 65% आबादी युवा है। MSME इस युवा शक्ति के लिए वरदान है।
अवसर
- रोजगार सृजन – हर वर्ष लाखों नए रोजगार।
- उद्यमिता – युवा अपना उद्योग और स्टार्टअप खड़ा कर सकते हैं।
- नवाचार – नई तकनीक और विचारों को MSME में स्थान मिलता है।
- ग्रामीण विकास – गाँव के युवा भी स्थानीय उद्योग से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
👉 इस प्रकार, MSME युवाओं को स्वावलंबन, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य प्रदान करते हैं।
7. MSME क्षेत्र की चुनौतियाँ
- पूँजी और ऋण की कमी।
- आधुनिक तकनीक तक सीमित पहुँच।
- विदेशी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा।
- मार्केटिंग और ब्रांडिंग की दिक्कतें।
- प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी।
8. समाधान और आगे की राह
- सरकारी सहयोग और सस्ती वित्तीय सहायता।
- तकनीकी उन्नयन और नवाचार पर बल।
- डिजिटल इंडिया और ई-कॉमर्स से जोड़ना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार।
- लोकल टू ग्लोबल अभियान से MSME को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाना।
👉 यदि ये कदम दृढ़ता से उठाए जाएँ तो MSME भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बना सकते हैं।
9. GAINS 2025 – आत्मनिर्भर भारत की सशक्त मिसाल
22 अगस्त 2025 को कोलकाता में Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) Ltd. ने तीसरे संस्करण “GAINS 2025” (GRSE Accelerated Innovation Nurturing Scheme) की शुरुआत की।
मुख्य बिंदु
- कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, IAS ने किया।
- विषय क्षेत्र: AI, Robotics, Renewable/Green Energy और Shipbuilding Efficiency।
- यह MSME और स्टार्टअप्स के लिए एक राष्ट्रीय ओपन चैलेंज है।
- पहले दो संस्करणों (2023 और 2024) में 100+ प्रस्ताव आए, जिनमें कई MSME और IIT विजेता बने।
महत्व
- GAINS 2025 यह साबित करता है कि MSME और स्टार्टअप्स रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार में सीधा योगदान दे सकते हैं।
- यह “मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया” मिशन का वास्तविक उदाहरण है।
- Cmde PR Hari (CMD, GRSE) ने कहा –
“Not only GRSE, but the Indian Startup Ecosystem has ‘gained’ a lot from GAINS.”
👉 यह पहल आत्मनिर्भर भारत को रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में और मजबूत बनाती है।
निष्कर्ष
आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल एक नारा नहीं, बल्कि 21वीं सदी की भारतीय क्रांति है। इसकी रीढ़ MSME हैं, जो अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और समाज – सभी के लिए अनिवार्य हैं।
- MSME = रोजगार + उद्यमिता + नवाचार।
- MSME = आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन।
- MSME = युवा शक्ति का सशक्तिकरण।
GAINS 2025 जैसे कार्यक्रम इस तथ्य को पुष्ट करते हैं कि यदि सरकार, उद्योग और युवा मिलकर आगे बढ़ें, तो आत्मनिर्भर भारत केवल स्वप्न नहीं बल्कि वास्तविकता बन जाएगा।
👉 इसलिए कहा जा सकता है:
“MSME का उत्थान = आत्मनिर्भर भारत का निर्माण = सुरक्षित, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र।”
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