"दूसरों की सफलता में अपनी खुशी ढूँढना — जीवन की सबसे बड़ी ताकत"
परिचय
आज की दुनिया में प्रतिस्पर्धा इतनी तेज़ है कि लोग अक्सर दूसरों की तरक्की देखकर ईर्ष्या या असुरक्षा महसूस करते हैं। लेकिन सच यह है कि जिस इंसान में दूसरों की उन्नति देखकर खुशी होती है, वही सच्चे अर्थ में विजेता है।
चाणक्य ने कहा था —
"जो दूसरों की सफलता में भी अपनी सफलता देखता है, वही सच्चा मित्र, सच्चा मानव और सच्चा विजेता है।"
दूसरों के विकास पर खुशी जताना न केवल हमारे चरित्र का परिचायक है, बल्कि यह हमारी मानसिक शांति, संबंधों की मजबूती और समाज के विकास के लिए भी ज़रूरी है।
1. चाणक्य और विदुर की दृष्टि से सफलता का रहस्य
चाणक्य नीति हमें सिखाती है कि —
"ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति स्वयं की उन्नति के मार्ग में काँटे बोता है, जबकि प्रसन्नचित्त व्यक्ति फूलों की बगिया तैयार करता है।"
वहीं विदुर नीति कहती है —
"जिसे दूसरों की खुशी देखकर खुशी होती है, वह हमेशा सुखी रहता है।"
यानी, दूसरों की सफलता पर जलन न करके अगर हम उनसे सीख लें और उनकी खुशी में शामिल हों, तो हम खुद भी तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं।
2. जीवन के हर क्षेत्र में इस सोच की ज़रूरत
(क) विद्यार्थी जीवन
अगर एक छात्र अपने सहपाठी की सफलता देखकर प्रेरित होता है, तो वह ईर्ष्या में समय गंवाने के बजाय खुद को और निखारता है।
उदाहरण:
रमा नाम की एक छात्रा ने देखा कि उसकी मित्र ने प्रतियोगी परीक्षा पास कर ली। वह दुखी होने के बजाय उसकी तैयारी की आदतों को अपनाने लगी और अगले साल उसने भी सफलता पाई।
(ख) पारिवारिक जीवन
घर में अगर एक सदस्य तरक्की करे, तो दूसरों को भी उसका सहयोग करना चाहिए। परिवार में यह भावना विश्वास और अपनापन बढ़ाती है।
महात्मा गांधी का यह कथन यहाँ फिट बैठता है —
"आपसी सहयोग से ही बड़े बदलाव आते हैं।"
(ग) व्यवसाय और संगठन
किसी कंपनी में अगर एक टीम या विभाग अच्छा काम कर रहा है, तो दूसरी टीम को उससे सीखना चाहिए, न कि प्रतिस्पर्धा में खींचतान करनी चाहिए।
सफल संगठन वही होते हैं, जहाँ एक की सफलता सबकी सफलता मानी जाती है।
(घ) नेटवर्क मार्केटिंग और डायरेक्ट सेलिंग
नेटवर्क मार्केटिंग में यह सिद्धांत सबसे ज्यादा काम करता है —
अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम बड़ी बने, तो आपको अपने सहयोगियों की तरक्की पर दिल से खुशी होनी चाहिए।
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कहते हैं —
"सफलता तभी बड़ी होती है, जब वह दूसरों को भी सफल बनाए।"
3. क्यों यह सोच हमें मजबूत बनाती है?
- ईर्ष्या कम होती है – मन हल्का रहता है।
- संबंध मजबूत होते हैं – लोग हमें भरोसेमंद और सहयोगी मानते हैं।
- सीखने का अवसर बढ़ता है – हम दूसरों की सफलता की रणनीति समझ पाते हैं।
- समाज में सकारात्मक माहौल बनता है – प्रतिस्पर्धा स्वस्थ हो जाती है।
4. प्रेरणादायक उदाहरण
- स्वामी विवेकानंद जब अमेरिका में गए, तो वहाँ के लोगों की प्रगति देखकर ईर्ष्या नहीं की, बल्कि प्रेरणा ली और उसे भारत में लागू करने का संकल्प लिया।
- रतन टाटा ने भी कहा है —
"अगर आप तेज़ चलना चाहते हैं तो अकेले चलिए, लेकिन दूर तक जाना चाहते हैं तो साथ चलिए।"
5. राष्ट्रभक्ति से जुड़ी प्रेरणा
अगर हम अपने देश के अन्य राज्यों, उद्योगों और व्यक्तियों की तरक्की देखकर खुश होंगे और उनसे सीखेंगे, तो भारत विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगेगी।
डॉ. कलाम का सपना — 2020 में भारत विकसित राष्ट्र — तभी सच होगा, जब हर नागरिक यह सोचे कि दूसरों की तरक्की मेरी तरक्की है।
प्रेरक कविता – "खुशियों का उजाला"
दूसरों की राह में दीप जलाना,
खुद के जीवन में सूरज बुलाना।
ईर्ष्या की आग बुझा दो मन से,
मिलकर चलो प्रेम के धन से।
जो खुशी दे, वही सच्चा साथी,
जो सीखे, वही असली ज्ञानी।
राष्ट्र की शान तभी बढ़ेगी,
जब सबकी जीत पर जय-जय गूँजेगी।
निष्कर्ष
दूसरों की सफलता देखकर मुस्कुराना एक छोटा-सा भाव है, लेकिन यह हमारे जीवन, समाज और राष्ट्र के विकास में बड़ा योगदान देता है।
अगर आप चाहते हैं कि जीवन में हमेशा खुश रहें, तो दूसरों की खुशी को अपनी खुशी बनाइए।
क्योंकि —
"सूरज सबको बराबर रोशनी देता है, जो दिल से बांटता है, वही असली महान है।"
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