राजा की तरह जीने के लिए, गुलाम की तरह मेहनत करनी पड़ती है” पर प्रेरणात्मक कविता



🌟 कविता 🌟

राजा की तरह जीने को, गुलाम सी मेहनत चाहिए,
सपनों को सच करने को, तप का संग्राम चाहिए।

ताज तो सबको भाता है, सबको शानो-शौकत चाहिए,
पर राह वही पा जाते हैं, जिनमें कुछ खास चाहिए।

रातें जागी, दिन पसीने में भीगा,
दर्द को सीने में दबा, न रोया, न जीगा।

ठोकरें खाई हजार, पर रुका नहीं कहीं,
राजा की तरह जीने को, गुलाम सी मेहनत चाहिए।

राजा के सिंहासन पर, सोने का नहीं है ताज,
उसके नीचे छुपी है, अनगिनत दुखों की आवाज।

सपने सच्चे होते हैं, मगर कीमत चुकानी पड़ती है,
हर खुशी के मेले में, तन्हाई निभानी पड़ती है।

धूप में जलना पड़ता है, कांटों पर चलना पड़ता है,
राजा की तरह जीने को, गुलाम सा मचलना पड़ता है।

मेहनत ही है असली राज, किस्मत से किसे मिला ताज?
पसीने की स्याही से, किस्मत का लिखा जाता है काज।

राजा वही कहलाता है, जो संघर्ष न डरता है,
जो गुलाम की तरह मेहनत करे, वही भविष्य बदलता है।

तो चलो साथी! थकना मत, अपने भाग्य को लिख डालो,
राजा की तरह जीने को, गुलाम सा जीना सीख डालो।



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